बैंक मैनेजर बना भरोसे का गुनहगार! 14 करोड़ 56 लाख की महाठगी का खुलासा, किसानों और आम ग्राहकों के भरोसे से खेला गया खेल…

बेमेतरा – बेमेतरा जिले के इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा में वर्ष 2022 में हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित कई आरोपियों ने बैंक के नियमों को ताक पर रखकर किसानों, आम हितग्राहियों और खाताधारकों के भरोसे का फायदा उठाया। फर्जी दस्तावेज, बेनामी ऋण, बिना सत्यापन के लोन, मृत लोगों के नाम पर कर्ज और रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करीब 14 करोड़ 56 लाख रुपये का गबन किया गया। मामले में एक और फरार आरोपी को तमिलनाडु के तंजावुर से गिरफ्तार किया गया है।
*भरोसे की कुर्सी पर बैठकर किया विश्वासघात*
बैंक वह जगह होती है जहां आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई और भविष्य की उम्मीदें सुरक्षित मानकर जमा करता है। लेकिन बेमेतरा के इंडियन ओवरसीज बैंक में कुछ लोगों ने इसी भरोसे को सबसे बड़ा हथियार बना लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक और उसके सहयोगियों ने बैंक के नियमों को दरकिनार कर योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपये का फर्जी ऋण बांट दिया। कई ऋण ऐसे लोगों के नाम पर स्वीकृत किए गए जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।*
*ऐसे रची गई 14 करोड़ की ठगी*
*पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने—*
*बिना वास्तविक सत्यापन के ऋण स्वीकृत किए।*
*फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक रिकॉर्ड में दर्ज किए।*
*कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी लोन जारी कर दिया।*
*किसानों और आम खाताधारकों के नाम का दुरुपयोग किया।*
*कृषि ऋण को व्यावसायिक ऋण में बदलने जैसी अनियमितताएं कीं।*
*ऋण वितरण के बाद आवश्यक निरीक्षण और सत्यापन नहीं किया।*
*बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर गबन को छिपाने का प्रयास किया।*
*जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं*
*पुलिस प्रेस नोट के अनुसार जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए*—
*कई ऋण बिना आवेदन और बिना पर्याप्त दस्तावेजों के स्वीकृत किए गए।*
*कुछ मामलों में ग्राहक के हस्ताक्षर तक संदिग्ध पाए गए।*
*कृषि भूमि का सही सत्यापन नहीं किया गया।*
*कई खातों में बिना अनुमति राशि स्थानांतरित की गई।*
*जिन किसानों के नाम पर ऋण दिखाया गया, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।*
*कई मामलों में बैंक अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की।*
*ऋण स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया बैंक की गाइडलाइन के विपरीत पाई गई।*
*किसानों और आम लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान*
इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा असर उन किसानों और गरीब हितग्राहियों पर पड़ा जिनके नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। कई लोगों को वर्षों बाद पता चला कि उनके नाम पर बैंक में ऋण चल रहा है।ऐसे मामलों में पीड़ितों को सरकारी योजनाओं, कृषि ऋण और अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
*तमिलनाडु से गिरफ्तारी*
पुलिस ने इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब विवेचना के दौरान फरार आरोपी विनीत दास को तंजावुर (तमिलनाडु) से गिरफ्तार कर बेमेतरा लाया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है और अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
*पुलिस की कार्रवाई*
इस मामले में थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए देश के दूसरे राज्य तक पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की विवेचना जारी है और यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।यह मामला केवल करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ हुए गंभीर छल का भी है। बैंक जैसे भरोसेमंद संस्थान में यदि नियमों की अनदेखी कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण बांटे जाएं, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान ईमानदार ग्राहकों और किसानों को उठाना पड़ता है। पुलिस की कार्रवाई से इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुल रही हैं, लेकिन यह मामला बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।


