बैगलेस डे: खेल-खेल में निखर रहा बच्चों का भविष्य

*योग, तर्कशक्ति और जीवन कौशल की गतिविधियों से बच्चों में बढ़ रही सीखने की रुचि, शिक्षक अनिल कुमार मौर्य की पहल बनी प्रेरणादायी*
कोयलीबेड़ा (उत्तर बस्तर कांकेर) –
शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की भावना के अनुरूप प्राथमिक शाला पीवी-129, स्कूल केंद्र ऐसेबेड़ा-1, विकासखंड कोयलीबेड़ा में आयोजित बैगलेस डे बच्चों के लिए सीखने का उत्सव बन गया। यहां पदस्थ शिक्षक अनिल कुमार मौर्य ने विद्यार्थियों को पुस्तकों के दायरे से बाहर निकालकर योग, शारीरिक विकास, तार्किक क्षमता, रचनात्मक सोच और भविष्य में काम आने वाले जीवनोपयोगी कौशलों से जुड़ी अनेक गतिविधियों का अभ्यास कराया।
*खेल-खेल में सीख रहे जीवन के महत्वपूर्ण पाठ*
बैगलेस डे के दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ योगाभ्यास, समूह आधारित खेल, मानसिक विकास के अभ्यास, तार्किक प्रश्नों और व्यवहारिक गतिविधियों में भाग लिया। सीखने का यह तरीका बच्चों को इतना पसंद आया कि उन्होंने हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों के चेहरे पर खुशी, आत्मविश्वास और विद्यालय के प्रति बढ़ता लगाव साफ दिखाई दिया।
*शिक्षक अनिल कुमार मौर्य की नवाचारी शिक्षण शैली की हो रही सराहना*
शिक्षक अनिल कुमार मौर्य द्वारा अपनाई गई नवाचारी शिक्षण पद्धति न केवल बच्चों को पढ़ाई से जोड़ रही है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव भी तैयार कर रही है। उनकी मेहनत और समर्पण से विद्यार्थी खेल-खेल में ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। स्थानीय पालक, विद्यालय परिवार और शिक्षा जगत से जुड़े लोग भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं।
*शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में बदल रही सरकारी स्कूलों की तस्वीर*
संकुल समन्वयक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी तथा शिक्षा विभाग के सतत मार्गदर्शन में विद्यालयों में नवाचार आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सरकारी विद्यालयों के प्रति बच्चों और पालकों का विश्वास बढ़ रहा है तथा बच्चों में नियमित रूप से स्कूल आने की ललक भी बढ़ी है।
*सरकारी स्कूल बन रहे सर्वांगीण विकास के केंद्र*
आज के सरकारी विद्यालय केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता और जीवन कौशल विकसित करने के प्रभावी केंद्र बन रहे हैं। बैगलेस डे जैसी पहल शिक्षा को आनंददायक, व्यवहारिक और भविष्य उन्मुख बना रही है। शिक्षक अनिल कुमार मौर्य जैसे समर्पित शिक्षकों के प्रयास निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं।


