नवागढ़ थाना मुख्यालय में खुलेआम सट्टा? आखिर जिम्मेदार कौन?
*बस स्टैण्ड के पीछे चल रहा है कथित कारोबार, फिर भी पुलिस को नहीं लगी भनक?*

नवागढ़, बेमेतरा। नवागढ़ थाना मुख्यालय क्षेत्र में कथित रूप से लंबे समय से संचालित हो रहे सट्टे के कारोबार को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि एक व्यक्ति अपने घर से और दूसरा व्यक्ति बस स्टैंड के पीछे से कथित रूप से सट्टे का संचालन कर रहा है। यदि यह सच है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इसकी जानकारी जिम्मेदार विभाग को क्यों नहीं है?
क्या थाना मुख्यालय क्षेत्र में चल रही गतिविधियों से पुलिस पूरी तरह अनजान है? या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है? जब दूर-दराज के गांवों में चल रही अवैध गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहुंच जाती है, तो थाना मुख्यालय के आसपास की गतिविधियां नजरों से कैसे ओझल हो जाती हैं?
क्षेत्र में लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर “बगल में छुरी, गांव भर ढूंढी” जैसी स्थिति क्यों दिखाई दे रही है? जब कथित रूप से थाना क्षेत्र के केंद्र में ही सब कुछ हो रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
क्या कारण है कि वर्षों से चर्चा में रहने वाले इस कथित कारोबार पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई? क्या शिकायतों की जांच हुई? यदि हुई तो उसका परिणाम क्या रहा? यदि जांच नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि आखिर कार्रवाई में देरी की वजह क्या है? क्या यह केवल लापरवाही है, या फिर कोई और कारण? जनता यह जानना चाहती है कि यदि अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो कानून का डर किसे है और कानून लागू करने की जिम्मेदारी किसकी है?
एक और सवाल यह भी है कि यदि खबरों और चर्चाओं के अनुसार कथित सट्टा संचालन की जानकारी आम लोगों तक पहुंच रही है, तो क्या पुलिस की खुफिया व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है? आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही?
अब सवाल सीधे जिम्मेदार अधिकारियों से है—
क्या नवागढ़ थाना क्षेत्र में सट्टा संचालित हो रहा है?
यदि नहीं, तो इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?
यदि हां, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आखिर जिम्मेदार कौन है?
क्या खबर प्रकाशित होने के बाद कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें नवागढ़ थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि इन सवालों का जवाब कार्रवाई के रूप में मिलता है या फिर जनता के मन में उठ रहे सवाल यूं ही अनुत्तरित रह जाते हैं।


