नवागढ़ गायत्री अस्पताल पर CMHO का औचक निरीक्षण, नर्सिंग होम एक्ट के अनुपालन की जांच तेज
सुशासन शिविर में शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, बंद कमरे में पूछताछ, निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप

नवागढ़, बेमेतरा।
नवागढ़ स्थित गायत्री अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की नजरें टिकी हुई हैं। सुशासन शिविर में प्राप्त शिकायतों के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा अस्पताल का औचक निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल के दस्तावेजों, स्टाफ की योग्यता, पंजीयन संबंधी अभिलेखों तथा नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के पालन की गहन जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के संचालन में प्रशिक्षित एवं योग्य नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि अस्पताल में आवश्यक योग्यता रखने वाले स्टाफ की कमी होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया जा रहा था। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
नर्सिंग होम एक्ट क्या कहता है?
निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम के संचालन के लिए निर्धारित नियमों के तहत संस्थान में पर्याप्त संख्या में योग्य चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल कर्मचारी, आवश्यक उपकरण, आपातकालीन सुविधाएं तथा निर्धारित रिकॉर्ड का संधारण अनिवार्य माना गया है। अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से प्राप्त योग्यता एवं संबंधित पंजीयन होना भी आवश्यक है।
यदि किसी अस्पताल में बिना योग्य एवं प्रशिक्षित स्टाफ के मरीजों का उपचार किया जाता है या निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जाता, तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी विषय माना जाता है। ऐसे मामलों में जांच के आधार पर नोटिस, पंजीयन निलंबन अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
बंद कमरे में पूछताछ, कई बिंदुओं पर खंगाले जा रहे दस्तावेज
जानकारी के अनुसार जांच टीम द्वारा अस्पताल प्रबंधन से विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता, ड्यूटी रोस्टर, पंजीयन प्रमाणपत्र, ऑपरेशन थिएटर संबंधी व्यवस्थाएं, भर्ती मरीजों का रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कई जानकारियां बंद कमरे में जुटाई जा रही हैं, जिससे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
निजी अस्पताल संचालकों में बढ़ी बेचैनी
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों में भी हलचल देखी जा रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में मानकों के पालन को लेकर व्यापक समीक्षा की संभावना भी बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल…
क्या अस्पताल में नर्सिंग होम एक्ट के सभी प्रावधानों का पालन किया जा रहा है?
क्या मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित एवं पंजीकृत स्टाफ उपलब्ध है?
क्या अस्पताल में संचालित सेवाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं?
जांच रिपोर्ट में कौन-कौन से तथ्य सामने आएंगे?
क्या स्वास्थ्य विभाग कोई बड़ी कार्रवाई करेगा?
फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रबंधन और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।


