बाजारपारा के डायवर्टेड प्लॉट की रजिस्ट्री पर उठे सवाल, प्रतिबंध के बावजूद कैसे हुई बिक्री? जांच की मांग तेज

बेमेतरा। शहर के बाजारपारा क्षेत्र स्थित एक डायवर्टेड प्लॉट की रजिस्ट्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संबंधित भूमि के संबंध में एसडीएम द्वारा स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है कि उक्त जमीन को टुकड़ों में विक्रय नहीं किया जाना है। इसके बावजूद न केवल भूमि की नकल जारी हुई, बल्कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी पूरी हो गई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब भूमि के विक्रय पर स्पष्ट शर्तें और प्रतिबंध मौजूद थे, तो आखिर नकल किस आधार पर जारी की गई और रजिस्ट्री की अनुमति कैसे मिल गई? इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्व एवं पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रतिबंधित या शर्तयुक्त भूमि की नकल जारी हो रही है, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि गंभीर जांच का विषय है। मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि कुछ बिचौलियों और कथित भू-माफियाओं द्वारा फर्जी दस्तावेजों अथवा भ्रामक अभिलेखों का सहारा लेकर भूमि सौदों को अंजाम दिया जा रहा है।
जांच के घेरे में कई सवाल
एसडीएम के आदेश या शर्तों के बावजूद नकल किस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जारी की गई?
क्या जारी की गई नकल वास्तविक अभिलेखों के अनुरूप थी या उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई?
रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया?
यदि भूमि के टुकड़े कर बिक्री पर रोक थी, तो पंजीयन प्रक्रिया को अनुमति कैसे मिली?
क्या इस पूरे मामले में विभागीय लापरवाही है या फिर किसी संगठित मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता?
क्रेता-विक्रेता भी हो सकते हैं प्रभावित
जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में कई बार क्रेता और विक्रेता भी पूरी कानूनी स्थिति से अनभिज्ञ रहते हैं। यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की त्रुटि या फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो भविष्य में भूमि विवाद, नामांतरण और स्वामित्व संबंधी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राजस्व और पंजीयन विभाग में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। यदि प्रतिबंधित शर्तों वाली भूमि की रजिस्ट्री संभव हो रही है, तो इससे आम नागरिकों का सरकारी व्यवस्थाओं पर विश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर नियमों को दरकिनार कर किसी को लाभ पहुंचाने का प्रयास। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई ही इस मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।
संभावित शीर्षक
1. “प्रतिबंध के बावजूद हुई रजिस्ट्री! बाजारपारा के डायवर्टेड प्लॉट ने खोली राजस्व व्यवस्था की पोल”
2. “एसडीएम की शर्तों को दरकिनार कर जमीन की बिक्री? नकल जारी होने से लेकर रजिस्ट्री तक सवालों के घेरे में”
3. “बेमेतरा में जमीन सौदे का बड़ा खेल? प्रतिबंधित प्लॉट की रजिस्ट्री पर उठे गंभीर सवाल”
4. “नकल किसने निकाली, रजिस्ट्री किसने की? बाजारपारा भूमि प्रकरण में जांच की मांग”
5. “राजस्व विभाग की चूक या मिलीभगत? डायवर्टेड प्लॉट की रजिस्ट्री ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें”


