खनन की ‘परमिशन’ पूछना पड़ा भारी! वार्ड नंबर-1 में बवाल, मारपीट के आरोपों से गरमाई राजनीति, सैकड़ों वार्डवासियों ने खोला मोर्चा..

*”सवाल पूछा तो जवाब में मिली दबंगई?”अवैध खनन के आरोपों के बीच पार्षद और समर्थक घेरे में*
बेमेतरा – जिला मुख्यालय बेमेतरा के नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक-1 इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक उबाल का केंद्र बना हुआ है। कथित खनन कार्य को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जनआक्रोश का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि वार्ड के कुछ युवाओं ने क्षेत्र में चल रहे खनन कार्य की अनुमति और वैधता को लेकर सवाल पूछ लिया, लेकिन जवाब दस्तावेजों से नहीं बल्कि कथित तौर पर दबंगई और मारपीट से दिया गया।
घटना के बाद पूरे वार्ड में नाराजगी की लहर दौड़ गई। शाम होते-होते सैकड़ों की संख्या में वार्डवासी, भूतपूर्व पार्षद, पूर्व जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक एकजुट होकर सामने आ गए और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
*खनन से ज्यादा चर्चा अब ‘गुंडागर्दी’ की*
वार्डवासियों का कहना है कि यदि खनन कार्य पूरी तरह वैध है तो अनुमति और दस्तावेज दिखाने में परेशानी क्यों हुई? आखिर ऐसा क्या था कि जानकारी मांगने वाले युवाओं को कथित रूप से धमकाने और मारपीट करने की नौबत आ गई?
लोगों का आरोप है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन वार्ड में सवाल पूछने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है।
पार्षद पर सीधे आरोप, वार्डवासियों ने मांगा जवाब
मामले में वार्ड पार्षद राजकुमार खाण्डे का नाम भी खुलकर सामने आने लगा है। वार्ड पिकरी के लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में हो रहे कथित अवैध खनन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाए।
*”कार्रवाई नहीं तो भूख हड़ताल”*
आक्रोशित वार्डवासियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और खनन मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे भूख हड़ताल सहित उग्र जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
राजनीतिक गलियारों में भी मची हलचल
घटना के बाद नगर की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी खेमे को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है, जबकि सत्तापक्ष के लिए यह मामला असहज स्थिति पैदा करता दिख रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
जनता पूछ रही है…
*खनन कार्य की अनुमति आखिर है या नहीं?*
*यदि अनुमति है तो सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?*
*युवाओं से कथित मारपीट करने वाले कौन हैं?*
*क्या कानून से ऊपर कुछ लोगों की दबंगई चल रही है?*
**प्रशासन निष्पक्ष जांच करेगा या मामला दबा दिया जाएगा?*
सबसे बड़ा सवाल
क्या वार्ड नंबर-1 में खनन से ज्यादा बड़ा मुद्दा अब लोकतांत्रिक अधिकारों पर कथित दबाव और दबंगई बन चुका है?
क्योंकि जब जनता सवाल पूछने से डरने लगे और जवाब की जगह विवाद खड़ा हो जाए, तब मामला केवल खनन का नहीं रह जाता, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होने लगते हैं।
फिलहाल वार्ड नंबर-1 में हालात गर्म हैं, जनता जवाब चाहती है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


