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August 4, 2026 9:22 am

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द राम भक्त

सनातन मर्यादा का प्रतीक

द राम भक्त

सनातन मर्यादा का प्रतीक

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अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी मा 

गँजेड़िहा ” गीत ”

————

 

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी मा 

दारु भट्ठी म वो, चोंगिहा रोवय अस्पताले म

मोर गँजेड़िहा हा या, मुड़ी धर के रोवय

मोर जुवड़िहा रोवय बीच खारे म

बीच खारे मं बाई एदे जी ——।

 

 

अई एकात पौवा ल पी लिही

तहां सुनतो दीदी

आनी बानी के तो बफलत हे

धिर नइ धरय ओ, गारी देहि दीदी

आनी बानी के या, खाये खोजे दीदी

हरिना के उचाट, वोतो कुदय दीदी

बनबईहा सरि, ओतो रुप दिखय

कोनो ल नइ चिन्हय ओ, कोनो ल नइ परखय या

ओतो फुहरे फुहर ल तो बकथें

ओतो बकथें — बाई एदे जी —–

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी म ।

 

 

आगी अउ पानी ल जेब म, ओतो धरे दीदी

सुनतो नारी मोरे बाते ला

दारु गाँजा म ओ, ओहा बुड़े दीदी

बींड़ी सिगरेट पी पी के ओ

तँबाखू खा खा के या, दाँत झरगे दीदी

एकर अतड़ी ह ओ, सरिगे हे दीदी

डाकटरे ह ना, ओ तो कहे दीदी

वो तो हरके बरजे नइ तो मानते, नइ तो मानते, बाई एदे जी ——

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी म।

 

 

अई दरुहा हा नरवा मा परे हे,

सुनतो नारी मोर बात

जाके दीदी ओकर मुखे ला

तुमन देखौ तो ओ, जाके देखौ दीदी

उहि चिखला म ओ, ओतो गिरे दीदी

ओतो सोभा बरन नइ तो जाते ओ

नइ तो जाते ओ, बाई एदे जी —–

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी म —-।

 

 

अई होंस अउ जोस ह उड़िगे

ओकर हँसा ह ओ, सुनतो दीदी कब उड़ही

तँबाखू जान लेवा हे ओ

जान ले के रयही

कुकुर गत दीदी, ओहर दिखथे ओ

बिघवा के सहीं, ओकर आँखी ह ओ

एदे छटके दीदी

मोला देखे रोवासी नइ आवय ओ

नइ आवय ओ, बाई एदे जी —–

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी म—-।

 

 

एदे खेती अउ खार ल हारिगे

ओतो जुवा म ओ,

सुनतो दीदी मोरे बाते ल

घर कुरिया ल वो, बेंची डारे हे दीदी

एक हथेरी जमीन, जमीन बाँचे नइ हे

सिरतो कइथौं दीदी, गौकी कइथौं दीदी

ओतो दारु बींड़ी सिगरेट पी पी घुमथे, ओतो घुमथे — बाई एदे जी—-

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी म —-।

 

 

अई फाट जातिस धरती समा जातेंव

अइसन दुख के सेती

सुनतो दीदी मोरे बाते ला

नान नान लइका हे ओ, मोर गोदी म ना

ओ खवईया दीदी, ओ पढईया दीदी

येहि रोगहा हा ओ, मर जाहि दीदी

एदे लइका ल कोन हा पोंसही

एदे पालही — बाई एदे जी ——

अई दरुहा रोवय दारु भट्ठी म

दारु भट्ठी म या

चोंगिहा रोवय अस्पताले मं

मोर गँजेड़िहा हा या, मुड़ी धरके रोवय

मोर जुवड़िहा रोवय बीच खारे म

बीच खारे म,,, बाई एदे जी ——

 

रचनाकार

डॉ. गोकुल बँजारे “चँदन”

बेमेतरा

 

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Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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