सुशासन तिहार या अव्यवस्था का त्योहार..?
“मंच पर सुशासन के बड़े-बड़े दावे… नीचे धूप में पिघलती रही जनता बेचारी!”

बेमेतरा जिले के ग्राम कुंरा में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम अब सवालों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की ऐसी पोल खोली कि लोग कहने लगे —
“नाम सुशासन का… लेकिन हाल बदइंतजामी का!”
खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल के गृह ग्राम में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों को बुलाया गया, लेकिन भीषण गर्मी और उमस से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था नजर नहीं आई।
धूप ऐसी कि लोग पसीने से तरबतर…
उमस ऐसी कि बुजुर्ग गमछे से हवा करते रहे…
और प्रशासनिक अमला सिर्फ कार्यक्रम की औपचारिकता निभाने में व्यस्त दिखा।
“जनता तपती रही… और जिम्मेदार छांव में बैठकर भाषण सुनाते रहे…”
ग्रामीणों में चर्चा है कि जब मंत्री के गृह क्षेत्र में यह हाल है, तो बाकी जगहों पर व्यवस्थाओं का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
लोग तंज कसते नजर आए —
“सुशासन तिहार में जनता को सुविधा कम, धूप ज्यादा मिली!”
कार्यक्रम में मंच, माइक और प्रचार की चमक जरूर दिखाई दी, लेकिन आम जनता के लिए न पर्याप्त पंडाल दिखा, न ठंडे पानी की व्यवस्था और न ही गर्मी से राहत के ठोस इंतजाम।
“लाखों के खर्च के दावे… लेकिन जनता बेहाल क्यों..?”
अब वायरल वीडियो प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
यदि सरकार जनता की समस्याएं सुनने के लिए कार्यक्रम करती है, तो क्या जनता की बुनियादी सुविधा भी प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए..?
“सुशासन के मंच सजे थे… लेकिन जनता धूप में सजा भुगत रही थी!”
“व्यवस्था के नाम पर वाहवाही… और जनता के हिस्से आई सिर्फ गर्म हवा!”
अब देखना होगा कि आगामी कार्यक्रमों में प्रशासन सबक लेता है या फिर “सुशासन” का यही हाल आगे भी देखने को मिलेगा।


