आवँव पेड़ लगाबो 
आज हरेली तिहार मा,आवँव जुर मिल पेड़ लगाबो ॥
धरती के श्रृंगार करके,सब सुख के जीवन बिताबो ॥
फेफड़ा कइथे पेड़ पौधा ला,धरती के दुनिया ला जनाबो ॥
सुद्ध हवा हम ला देथे,पेड़ पौधा ला अऊ बढ़ाबो ॥
वायु प्रदुषण होवय झन,अइसन उपाय अपनाबो ।
फसल के पैरा भूसा ला,खेत के माटी मा मिलाबो ॥
जंगल झाड़ी खनिज संपदा, भरे “कटोरा धान ” हे ।
“हर्बल स्टेट ” हमर छत्तीसगढ़ के,एक खास पहिचान हे ॥
पेड़ पौधा ला रूंध बांध के,येला हमन बचाबो ।
पानी सींच अऊ देख रेख करके,सबके छाँव बनाबो ॥
पानी गिराथे पेड़ पौधा मन,ये बात सबो ला बताबो ।
झन काटौ पेड़ पौधा ला,जुर मिल अभियान चलाबो ॥
न लगय गर्मी न परय दुकाल,जब धरती ला हरियाबो ।
भू – जल स्तर बने रइही,मन आगर गंगा नहाबो ॥
पेड़ पौधा के शीतल छाँव के,शीतल पवन पुरवईया ।
रद्दा बाट अवईया-जवईया ला,शुकुन के सांस देवईया ॥
हरिया जाही धरती दाई,जब अन्न फसल उगाबो ।
सेवा के बदला मेवा मिलही,सुख चैन से खाबो ।
पर्यावरण ला बचाए खातिर,कोला बारी मा पेड़ बचाबो ।
“एक पेड़ माँ के नाम ” अभिमान मा,पेड़ पौधा लगाबो ॥
कमलेश ढिण्ढे ” कमल ”
शिक्षक व साहित्यकार
बहुनवागाँव , बेमेतरा


