हकिकत पर और कितना पर्दा..? गायत्री अस्पताल की हकिकत से सब है रूबरू… फिर पर्दे के आड पर कब तक अपने आप को बचाओ गे..?

*छुटभैया नेताओं के भरोसे कब तक चलेगा लोगों के सेहत के साथ खिलवाड़*
*कार्यवाही से बचने लगातार राजनितिक दबाव व संरक्षण देने जल्द होगे बेनकाब*
*कौन और किस अस्पताल के संचालक है जो स्पाई कैमरे के आड पर ईलाज कराने आए महिलाओ और लडकियो का लेते है गोपनीय विडिओ और लेते है फोटो, जल्द होगा खुलासा?*
बेमेतरा – बेमेतरा नवागढ में क्या चल रहा..? एक नजर जरूर डाले! पैसे के लिए गलत को सही कहने का ठेका लेने वाले एक चैनल ने तो जिता जागता उदाहरण पेश कर दिया की किस तरह सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले को चंद पैसे के चक्कर में कैसे बेहतर बताते हुए दिखाई दिए… इस बात को क्यों नही दिखाया की एक अनुबंधित एम बी बी एस डॉ विश्वकर्मा एक निजी कम्पनी में जब 24 घंटे सेवा दे रहे है तो फिर नवागढ गायत्री अस्पताल कितना समय अपनी सेवा देते है..? एक डॉक्टर दो जगह एक ही समय पर कैसे सेवा दे सकता है..? वही नर्सिंग स्टाफ की योग्यता और अनुभव की हकिकत क्यो नही दिखाया..? कैसे स्वस्थ लोगों को मरीज बनाकर बेड पर सुला दिया गया..? और बेहतर ईलाज का प्रचार भला आम लोगों को कब तक बेवकुफ बनाते रहेगे गायत्री अपस्ताल..? क्या लोगों के जीवन से ज्यादा पैसा प्यारा है..? अस्पताल का मेडिकल संचालन स्थान पर प्रश्न क्यों नही उठाए..? एक्सपायरी दवा मिलने की क्या खबर स्थानीय संवाददाता को जानकारी नही थी.? भला और बुरा में क्या अंतर समझ नही आया और चंद पैसे में अपनी विश्वसनीयता को क्यों दाव में लगा दिए..? मतलब कोई रिपोर्टर जब किसी संस्थान का वास्तविकता का खबर उजागर करेगे के बजाय उनसे मिलकर विज्ञापन लेकर उनकी कमजोरीयों पर पर्दा कब तक डालते रहेगे..? जरा शर्म करो कुछ रहम करो गरीबो पर जो विश्वास के साथ आपकी चैनल मे दिखाई गई विज्ञापन के भरोसे ना जाने कितने मासूमों और गरीबो के सेहत के साथ खिलवाड़ करेगें..? मेरी यह पोस्ट भले ही आपको सोचने पर विवश कर देगा किंतु हकिकत को आप ज्यादा दिन तक छुपाकर नही रख सकते..?


