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August 4, 2026 7:59 am

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द राम भक्त

सनातन मर्यादा का प्रतीक

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गायत्री हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग का छापा: जांच के दौरान एक भी MBBS डॉक्टर नहीं, ना फार्मासिस्ट नहीं, फिर किसके भरोसे चल रहा था ऑपरेशन और इलाज?

गायत्री हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग का छापा: जांच के दौरान एक भी MBBS डॉक्टर नहीं, ना फार्मासिस्ट नहीं, फिर किसके भरोसे चल रहा था ऑपरेशन और इलाज?

 

 

*तीन एक्सपायरी एम्पूल की भी हुई जप्ती*

 

*नर्सिंग होम एक्ट को खुली चुनौती या जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी? नवागढ़ के गायत्री हॉस्पिटल पर उठे गंभीर सवाल*

 

*आम लोगों के सेहत के साथ खिलवाड करने वाले को संरक्षण देने छुटभैया नेताओं के भी चेहरे भी याद रखना जो अपना होने का हमदर्दी और पीठ पीछे अवैधानिक कृत्य करने वाले को संरक्षण देते हैं*

 

 

नवागढ़ – नवागढ़ स्थित निजी गायत्री हॉस्पिटल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CHMO) की अगुवाई में हुई जांच के बाद पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं ने न केवल अस्पताल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BMO), ड्रग विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान अस्पताल में एक भी MBBS चिकित्सक और फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज, एलोपैथिक दवाओं का उपयोग और ऑपरेशन जैसी प्रक्रियाएं संचालित हो रही थीं, तो उनकी जिम्मेदारी किस योग्य चिकित्सक के हाथों में थी?

नर्सिंग होम एक्ट क्या कहता है?

छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एवं क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट संबंधी नियमों के अनुसार किसी भी अस्पताल में उसके पंजीयन एवं स्वीकृत सेवाओं के अनुरूप योग्य चिकित्सक, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, रिकॉर्ड संधारण, आपातकालीन सुविधाएं एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं अनिवार्य होती हैं।

यदि किसी अस्पताल में एलोपैथिक चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) का दावा किया जाता है, तो वहां संबंधित योग्यता प्राप्त चिकित्सकों की उपलब्धता आवश्यक मानी जाती है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान MBBS डॉक्टर का अनुपस्थित मिलना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

ऑपरेशन हो रहे थे तो जिम्मेदारी किसकी?

क्षेत्र में चर्चा है कि अस्पताल में एलोपैथिक इलाज और ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह जानना आवश्यक होगा कि ऑपरेशन थिएटर में कौन चिकित्सक उपस्थित रहता था? मरीजों की पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग कौन करता था? रात के समय आपातकालीन स्थिति में कौन जिम्मेदार था?

क्या अस्पताल में केवल कागजों पर डॉक्टर दर्ज थे या वास्तव में सेवाएं भी दे रहे थे? यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

एक्सपायरी दवाएं, बिना रिकॉर्ड इलाज और लैब पर सवाल

सूत्रों के अनुसार निरीक्षण में अस्पताल परिसर में कुछ एक्सपायरी दवाएं मिलने की चर्चा है। इसके अलावा मरीजों के पंजीयन, बिलिंग रिकॉर्ड, रिसेप्शन रजिस्टर एवं उपचार संबंधी अभिलेखों के रखरखाव में भी कमियां सामने आई हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह बताई जा रही है कि मरीजों को नियमित प्रिस्क्रिप्शन पैड के बजाय साधारण कागज पर दवाइयां लिखकर दी जा रही थीं। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह चिकित्सा अभिलेखों की पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करता है।

वहीं अस्पताल में लैब का बोर्ड तो लगा हुआ था, लेकिन आवश्यक लैब सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

सीढ़ियों के नीचे मेडिकल स्टोर?

निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर भी जांच के दायरे में आया है। चर्चा है कि मेडिकल स्टोर निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था और सीढ़ियों के नीचे से दवा वितरण किया जा रहा था।

यदि ऐसा है तो सवाल सीधे ड्रग विभाग पर भी उठता है कि आखिर इतने वर्षों तक निरीक्षण और निगरानी के दौरान यह स्थिति कैसे नजरअंदाज होती रही?

आयुर्वेदिक चिकित्सक के नाम पर एलोपैथिक अस्पताल?

क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि अस्पताल का संचालन आयुर्वेदिक चिकित्सक के नाम पर किया जा रहा है। यदि ऐसा है और अस्पताल में एलोपैथिक उपचार एवं ऑपरेशन किए जा रहे थे, तो जांच एजेंसियों को स्पष्ट करना होगा कि यह सब किस कानूनी प्रावधान के तहत संचालित हो रहा था।

जांच में SDM, थाना प्रभारी और BMO की अनुपस्थिति पर भी सवाल

नर्सिंग होम एक्ट के तहत होने वाली कार्रवाई में कई मामलों में प्रशासनिक एवं स्थानीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान एसडीएम, थाना प्रभारी एवं ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

यदि मामला इतना गंभीर था कि CHMO स्वयं निरीक्षण करने पहुंचे, तो संबंधित अधिकारी मौके पर क्यों नहीं थे? क्या यह महज औपचारिक जांच थी या वास्तव में कार्रवाई की मंशा से निरीक्षण किया गया?

कलेक्टर जनदर्शन में शिकायतें, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पूर्व में कलेक्टर जनदर्शन एवं अन्य माध्यमों से शिकायतें किए जाने की बात सामने आ रही है। यदि शिकायतें पहले से मौजूद थीं तो स्वास्थ्य विभाग, ड्रग विभाग एवं प्रशासन ने समय रहते जांच क्यों नहीं की?

यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा कोई भी मामला सीधे लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा होता है।

अब घेरे में स्वास्थ्य विभाग और ड्रग विभाग

इस पूरे मामले में केवल अस्पताल प्रबंधन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी और ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के दायरे में आती दिखाई दे रही है।

यदि अस्पताल में वास्तव में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, रिकॉर्ड, दवा भंडारण, मेडिकल स्टोर और ऑपरेशन संबंधी मानकों का उल्लंघन हो रहा था, तो इतने लंबे समय तक नियमित निरीक्षणों में यह सब कैसे छिपा रहा?

क्या संबंधित विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया या फिर निरीक्षण के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई?

सबसे बड़ा सवाल — क्या अस्पताल होगा सील?

अब पूरे नवागढ़ क्षेत्र की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

क्या अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी होगा?

क्या नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी?

क्या अस्पताल को सील किया जाएगा?

क्या मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?

इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल एक बात साफ है कि यदि निरीक्षण में सामने आई अनियमितताएं सही साबित होती हैं, तो यह मामला केवल एक निजी अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा होगा।

Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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