खाद की किल्लत, कालाबाजारी और प्रशासनिक उदासीनता पर किसान संघ का हमला, सरकार से पूछा— आखिर किसानों की सुनवाई कब होगी?

रायपुर। खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही प्रदेश में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। किसानों के हितों की बात करने वाली सरकार और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि आदान उपलब्ध नहीं कराए गए तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की स्थिति निर्मित हो सकती है।
किसान संघ का कहना है कि प्रदेश में वर्षों से खाद की कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और वितरण व्यवस्था में अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि जब हर वर्ष खाद संकट की आशंका रहती है तो शासन और प्रशासन पहले से तैयारी क्यों नहीं करता?
संघ ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर किसान आज भी खाद, बीज और डीजल जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर किसानों को निर्धारित मात्रा में खाद नहीं मिल रही, जबकि निजी विक्रेताओं द्वारा अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
किसानों के सवाल, जिनका जवाब सरकार को देना होगा
यदि प्रदेश में खाद का पर्याप्त भंडारण है तो समितियों के बाहर लंबी कतारें क्यों लग रही हैं?
कालाबाजारी की शिकायतों के बावजूद कितने विक्रेताओं पर प्रभावी कार्रवाई हुई?
किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने की ठोस योजना क्या है?
एग्रीस्टैक में पंजीकृत किसानों को नगद भुगतान पर खाद उपलब्ध कराने में बाधा क्या है?
हर वर्ष खाद संकट की स्थिति बनने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं होती?
किसान संघ की दो टूक चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने कहा कि देश और प्रदेश की खाद्य सुरक्षा किसानों पर निर्भर है, लेकिन यदि अन्नदाता को ही समय पर खाद और बीज नहीं मिलेगा तो उत्पादन प्रभावित होना तय है। इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ प्रदेश की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक डीजल उपलब्ध कराने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सबसे बड़ा सवाल
क्या प्रशासन खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों की जरूरतों को लेकर गंभीर है, या फिर हर वर्ष की तरह इस बार भी किसान खाद के लिए भटकते रहेंगे और जिम्मेदार विभाग कागजी तैयारियों का दावा करते रहेंगे?
किसान संघ का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह केवल खाद की कमी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि किसानों के धैर्य और सरकार की कृषि नीतियों की वास्तविक परीक्षा बन जाएगा।


