धान कमी, राशन गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता के आरोपों में फंसे विक्रेता को नहीं मिली राहत, उप पंजीयक न्यायालय ने सेवा समाप्ति आदेश रखा बरकरार

रामकुमार मिरचण्डे की याचिका खारिज, 279.65 क्विंटल धान कमी और राशन दुकान में कमी का मामला
उमाशंकर दिवाकर बेमेतरा – सेवा सहकारी समिति मर्यादित देवरबीजा के विक्रेता एवं धान उपार्जन केंद्र केशडबरी के प्रभारी रहे रामकुमार मिरचण्डे को उप पंजीयक सहकारी सोसायटीज न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। उप पंजीयक श्रीमती शिल्पा अग्रवाल ने उनके द्वारा दायर सेवा विवाद आवेदन को निरस्त करते हुए समिति द्वारा जारी सेवा समाप्ति (पद से पृथक) आदेश दिनांक 19 फरवरी 2026 को यथावत बनाए रखा है।
प्रकरण के अनुसार रामकुमार मिरचण्डे सेवा सहकारी समिति मर्यादित देवरबीजा में विक्रेता के पद पर कार्यरत थे तथा धान उपार्जन केंद्र केशडबरी में प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। समिति द्वारा उन पर वित्तीय अनियमितता, केशबुक संधारण में लापरवाही, राशन सामग्री में कमी तथा धान उपार्जन केंद्र में 279.65 क्विंटल धान की कमी के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
राशन दुकान में मिली भारी कमी
दस्तावेजों के अनुसार समिति द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान में चावल की कमी पाए जाने पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बेरला द्वारा नोटिस जारी किया गया था। बाद में पुनः राशन सामग्री में कमी पाए जाने पर कार्रवाई की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए 17 फरवरी 2026 को समिति को आबंटित शासकीय उचित मूल्य दुकान भी निरस्त कर दी गई थी।
राशन कमी के मामले में रामकुमार मिरचण्डे द्वारा दो किश्तों में 67,400 रुपये एवं 60,199 रुपये, कुल 1,27,599 रुपये बैंक में जमा कराए गए थे। हालांकि न्यायालय ने माना कि राशि जमा करने मात्र से अनियमितता समाप्त नहीं हो जाती।
279.65 क्विंटल धान कमी का मामला भी बना आधार
समिति द्वारा प्रस्तुत धान मिलान पत्रक के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान उपार्जन केंद्र केशडबरी में 279.65 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई। न्यायालय ने माना कि केंद्र का प्रभार रामकुमार मिरचण्डे के पास था, इसलिए इस कमी के लिए प्रथम दृष्टया वे जिम्मेदार हैं।
भाई को नियम विरुद्ध ऋण देने का भी आरोप
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि रामकुमार मिरचण्डे के भाई राजकुमार मिरचण्डे पर पूर्व से ऋण बकाया होने के बावजूद उन्हें पुनः ऋण स्वीकृत किया गया। अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2022 में राजकुमार पर 3.26 लाख रुपये से अधिक का ऋण बकाया था, इसके बावजूद अतिरिक्त ऋण प्रदान किया गया। न्यायालय ने इसे भी गंभीर अनियमितता माना।
सुनवाई का अवसर मिलने का दावा सही माना गया
रामकुमार मिरचण्डे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उन्हें जांच और सुनवाई का अवसर दिए बिना पद से पृथक किया गया। लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों और नोटिसों के आधार पर माना कि समिति एवं प्रशासन द्वारा उन्हें पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया था।
उप पंजीयक का स्पष्ट फैसला
उप पंजीयक श्रीमती शिल्पा अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत दस्तावेजों से समिति को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली अनियमितताएं और गबन के तथ्य सामने आते हैं। ऐसे में समिति द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश उचित है और उसे स्थिर रखा जाना चाहिए।
इसके साथ ही रामकुमार मिरचण्डे की सेवा बहाली की मांग खारिज करते हुए सेवा से पृथक करने का आदेश बरकरार रखा गया है।


