85 उपार्जन केंद्रों का लेखा-जोखा लंबित, आखिर जिम्मेदार कौन? जिला विपणन अधिकारी को नोटिस, लेकिन क्या केवल एक अधिकारी ही दोषी है…?

उमाशंकर दिवाकर बेमेतरा – जिले में धान खरीदी के बाद लेखा मिलान कार्य में भारी लापरवाही सामने आने पर सहकारिता विभाग ने जिला विपणन अधिकारी गजेन्द्र राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि 85 उपार्जन केंद्रों का लेखा मिलान महीनों तक लंबित रहा तो आखिर इसकी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी की है या पूरे विभागीय अमले की?
उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं बेमेतरा द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 56(1) के तहत लेखा मिलान पत्रक प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिले के 85 उपार्जन केंद्रों का लेखा मिलान अब तक पूरा नहीं हो सका।
कई बार निर्देश दिए गए, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
नोटिस में उल्लेख है कि पूर्व में भी धान का संपूर्ण उठाव कर लेखा मिलान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। यदि बार-बार निर्देश दिए गए थे तो सवाल उठता है कि निर्देशों की अनदेखी करने वालों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या केवल जिला विपणन अधिकारी ही जिम्मेदार हैं?
धान खरीदी प्रक्रिया में विपणन संघ, सहकारी समितियां, उपार्जन केंद्र प्रभारी, लेखा कर्मचारी तथा अन्य विभागीय अधिकारी भी शामिल रहते हैं। ऐसे में प्रश्न यह भी है कि जब 85 केंद्रों का लेखा मिलान लंबित था तो संबंधित केंद्र प्रभारियों, लेखापालों और पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?
किसानों और समितियों को नुकसान का जिम्मेदार कौन?
सहकारिता विभाग स्वयं मान रहा है कि लेखा मिलान में देरी से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों एवं किसानों के आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं। यदि ऐसा है तो संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से इसकी वसूली होगी?
क्या धान खरीदी व्यवस्था में सब कुछ ठीक है?
85 उपार्जन केंद्रों का लेखा मिलान लंबित होना कोई छोटी प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता। इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या धान खरीदी, भंडारण और उठाव प्रक्रिया में कहीं और भी अनियमितताएं छिपी हुई हैं? क्या विभाग इस पूरे मामले की गहन जांच कराएगा?
42.50 करोड़ तक का अर्थदंड संभव!
विभाग ने 08 जून 2026 तक लेखा मिलान पूरा कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अन्यथा प्रति उपार्जन केंद्र 50 हजार रुपये तक के अर्थदंड की चेतावनी दी गई है। यदि 85 केंद्रों के आधार पर गणना की जाए तो मामला 42.50 लाख रुपये तक के संभावित दंड का बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल…
85 उपार्जन केंद्रों का लेखा मिलान आखिर लंबित क्यों रहा?
विभागीय समीक्षा बैठकों में यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठा?
जिम्मेदार कर्मचारियों और केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई कब होगी?
किसानों और समितियों के हितों की अनदेखी करने वालों पर जवाबदेही कौन तय करेगा?
क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल की आहट?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 08 जून तक लेखा मिलान पूरा होता है या फिर विभागीय कार्रवाई की आंच जिले के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों तक भी पहुंचती है।


