इतिहास और आस्था का संगम : ग्राम सिरसा में बीच तालाब बनेगा गुरू बालकदास साहेब व गौतम बुद्ध का भव्य मंदिर

*भूमिपूजन कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब, प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को सहेजने ग्रामवासियों की अनूठी पहल*
बेमेतरा / बेरला – ग्राम सिरसा में आज आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब नया तालाब के मध्य में बलिदानी गुरू बालकदास साहेब एवं तथागत भगवान गौतम बुद्ध की भव्य प्रतिमा और मंदिर निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। पूरे गांव में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन कार्यक्रम में शामिल हुए।इस ऐतिहासिक अवसर पर विकास खंड स्तरीय अध्यक्ष श्री हेमंत चंदेल, संरक्षक कुलेश्वर कुर्रे, सुखदेव टंडन, वरूण मार्कंडेय, ग्राम प्रमुख कुमार गायकवाड़, सरपंच प्रतिनिधि संजय यदु, उपसरपंच कुवरजीत, रमेश टंडन, साहेब दास मिरी, खेलावन मिरी गुरुजी, रतनलाल घिदौड़े, बाबूलाल घिदौड़े, हरिशंकर मल्होत्रा, प्रेम डहरिया, सुशील डहरिया, रामसागर टंडन, सुरेश मिरी, महेत्तर मिरी, मानकचंद, टिकेश्वर घिदौड़े, ईश्वरी सोनवानी, जगनमोहन, जनार्दन बंजारे, छेदीलाल, भारत चेलक, गुलाबचंद, चन्द्रहास, चन्द्रप्रकाश टंडन, जीतु, प्रेम घृतलहरे, लोचन टंडन, मंजीत गायकवाड़, लालदास टंडन एवं राजकुमार देवरबीजा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
विशेष बात यह रही कि मंदिर निर्माण के लिए तालाब को सुखाकर बीचों-बीच भूमि तैयार की गई है, जहाँ आने वाले समय में भगवान गौतम बुद्ध एवं गुरू बालकदास साहेब की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थल आने वाले समय में धार्मिक एवं ऐतिहासिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनेगा।ग्रामीणों ने बताया कि छत्तीसगढ़ का इतिहास “छत्तीस गढ़ों” से जुड़ा रहा है, जिसमें 18 गढ़ रायपुर और 18 गढ़ रतनपुर के अधीन थे। उन्हीं ऐतिहासिक स्थलों में ग्राम सिरसा का भी विशेष महत्व रहा है। गांव से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर स्थित प्राचीन पुरातत्व मंदिर वर्तमान में देवरबीजा क्षेत्र में आता है, जो कभी सिरसा की ऐतिहासिक पहचान हुआ करता था।
आज भी सिरसा के भिखमपुर खार क्षेत्र में जब खेतों में नागर हल चलाया जाता है, तब प्राचीन कालीन खपरा, मिट्टी के बर्तन और बैला जैसी पुरातात्विक सामग्री निकलती है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत की गवाही देती है। ग्राम प्रमुख कुमार गायकवाड़ के मार्गदर्शन में प्रस्तावित यह मंदिर निर्माण केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि गांव की प्राचीन पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की एक प्रेरणादायक पहल भी माना जा रहा है।भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिला। लोगों ने इसे गांव के लिए गौरव और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर बताया।


