नवागढ़ नगर पंचायत में सियासी घमासान — अध्यक्ष सिद्धार्थ चौहान की कुर्सी पर उठा तूफान, हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद फिर गरमाई राजनीति

नवागढ़। नगर पंचायत नवागढ़ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। यहां की सियासत में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदले कि आम जनता भी असमंजस में पड़ गई कि आखिर चल क्या रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष सिद्धार्थ चौहान को लेकर जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने स्थानीय राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है।
सबसे पहले अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस के जरिए प्रशासन की ओर से कुछ गंभीर बिंदुओं पर जवाब मांगा गया था। मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अचानक पुराने मामले को आधार बनाकर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
अविश्वास प्रस्ताव के बाद हालात इतने बदले कि सिद्धार्थ चौहान को पद से मुक्त कर दिया गया। इस फैसले ने न केवल उनके समर्थकों को चौंकाया बल्कि नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए। समर्थकों का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
मामला यहीं नहीं रुका। अध्यक्ष सिद्धार्थ चौहान ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए पुनः जन सेवा का अवसर प्रदान किया। कोर्ट के इस निर्णय के बाद एक बार फिर नवागढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:
आखिर अचानक नोटिस, फिर अविश्वास प्रस्ताव और फिर पद से हटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों हुई?
क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव या रणनीति काम कर रही थी?
क्या स्थानीय विधायक और मंत्री की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में निष्पक्ष रही?
स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं कि सत्ता पक्ष के कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध रही है। विपक्षी नेताओं और चौहान समर्थकों का आरोप है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की गई।
वहीं, इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कोर्ट ने अध्यक्ष को राहत दी है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं प्रक्रिया में खामियां रही हैं।
अब देखना होगा कि:
क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी?
और सबसे अहम, क्या नवागढ़ की जनता को स्थिर और पारदर्शी नेतृत्व मिल पाएगा?
फिलहाल, नवागढ़ नगर पंचायत की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है, और जनता जवाब चाह रही है — आखिर उनके जनप्रतिनिधि के साथ यह सब क्यों हुआ?


