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August 4, 2026 6:56 am

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द राम भक्त

सनातन मर्यादा का प्रतीक

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सोसायटियों में डीएपी खाद नहीं, किसान चिंतित थान खम्हरिया तहसील में 1 हजार टन डीएपी खाद की डिमांड

सोसायटियों में डीएपी खाद नहीं, किसान चिंतित

थान खम्हरिया तहसील में 1 हजार टन डीएपी खाद की डिमांड

महामाया धान बीज की भी आपूर्ति नहीं होने से कृषक परेशान

द राम भक्त -बेमेतरा/थानखम्हरिया – खरीब फसल धान की बोनी शुरू होने के पूर्व ही तहसील क्षेत्र में खाद व बीज की संकट घहराने लगा है। धानखम्हरिया, बनरांका, कुरूद, कन्हेरा, अगरी, खाती, खैरझिटीकला, दरों, हाटरांका, ठेलका, बेलतरा, सोमईकला जैसे सोसायटियों में अब तक डीएपी जैसे महत्वपूर्ण खाद की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। जबकि महामाया धान बीज भी किसी भी सोसायटी में नहीं पहुंचने से किसान चिंतित है।

वर्तमान में धानखम्हरिया तहसील क्षेत्र के सभी सोसायटी में कुल 1 हजार टन से भी अधिक डीएपी खाद की डिमांड बताई जा रही है जबकि महामाया धान बीज 15 सौ पैकेट किसानों की ओर से मांग आयी है। जिसकी पूर्ति समय पूर्व आवश्यक है। शासन द्वारा खाद बीच नहीं मिलने की स्थिति में किसान मजबूरन खुले बाजार से

अधिक दर पर खाद बीज की खरीदी करते है। जिससे उनको आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ती है। वर्तमान में किसानों को सोसायटियों से राखड़ खाद, यूरिया, पोटास तथा एमपीआर जैसे खाद उपलब्ध हो पा रही है। वहीं केसीसी ऋण के लिए सहमति पत्र पेश करने की अनिवायर्ता से भी किसानों को भटकते देखा गया है।

धरती के भगवान कहलाने वाले अन्नदाता आज सरकार की गलत नीतियों व लापरवाही के कारण ही खाद बीज की संकट से गुजर रहे है। समूचे भारत वर्ष में सबसे अधिक कीमत पर धान खरीदने वाली छग राज्य में आज खाद बीज संकट गहरा गयी है। जिसे समय रहते सुधारने की जरूरत है, ताकि खरीब फसल धान, सोयाबीन व अरहर जैसे फसलों के लिए किसान को खाद बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। गौरतलब है कि इस वर्ष समय पूर्व 4 जून को मानसून के दस्तक देने की खबरों को लेकर तहसील क्षेत्र के किसान खरीफ फसल की बोनी को लेकर तैयारी में जुट गए है। खेतों की जोताई, साफ, सफाई से लेकर तमाम तैयारी अंतिम चरण में है। जैसे ही मानसून

की बौछारे पड़ेगी वैसे ही किसान खेतों की ओर रूख करने लगेंगे परंतु प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष अभी तक सोसायटियों में डीएपी खाद व धान बीज की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं किए जाने से किसानों के समक्ष संकट गहराने लगा है। अकेले थानखम्हरिया सोसायटी में 960 हेक्टेयर धान की रकबा के लिए कुल 120 टन डीएपी खाद की डिमांड आयी है, जबकि तहसील क्षेत्र लगभग 1 हजार टन से अधिक डीएपी खाद की मांग किसानों ने किया। जिसमें एक बोदी भी सोसायटीरो नहीं पहुंचा। इसी तरह अकेले थानखम्हरिया सोसायटी में 200 पैकेट महामाया धान बीज की डिमांड के साथ ही समूचे तहसील में करीब 25 सौ से भी अधिक महामाया धान बीज की डिमांड कृषकों की ओर से आयी है।

अब किसानों के समक्ष केवल एक सप्ताह रह गया है, जब वह अपने खाद, बीज का भंडारण कर कृषि कार्य में जुट जाएंगे। मगर इस वर्ष लग नहीं रहा कि किसानों को खाद, बीज उचित समय में मिल पाएगा। सनद रहे थान खम्हरिया सोसायटी में 24 सौ हेक्टेयर धान की रकबे में केवल 960 हेक्टेयर हेतु खाद, बीज की डिमांड आयी है, जो आधे से भी कम है। बाकि के किसान खुले बाजार से धान बीज खरीद रहे है। अब तक

प्रदेश सरकार उद्योगपतियोंरियों सरकार है- मनहरण सिन्हा

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मनहरण सिन्हा ने प्रदेश में खाद बीज संकट पर अपने एक बयान में कहा कि जब जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है, तब तब किसान संकट में रहते है। खरीन फसल बोआई शुरू होने के पहले ही किसानों को खाद, बीज की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। भाजपा के केवल किसान हितैषी होने की स्वांग रचती है। सही मायने में वह किसान विरोधी और उद्योगपतियों की हितैषी सरकार है। उन्होंने कहा कि व्यपारियों का गोदाम डीएपी खाद से भरा पड़ा है और सरकार को खाद का टोटा है। जब किसानों को संसाधन उपलब्ध नहीं होगी, तो वह उत्पादन नहीं ले पाएगा। सरकार यथोचित समय में किसानों को खाद बीज उपलब्ध कराए वरना आन्दोलन किया जाएगा।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी थानखम्हरिया के किसान मोर्चा अध्यक्ष व उमरावनगर सरपंच

कर्ज में डूबी प्रदेश सरकार किसानों को खाद बीज उपलब्ध कराने में असा निमित और राजा का वातावरण राजेश साहू

राजेश साहू ने खाद, बीज संकट पर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कर्ज में डूब चुकी है। चहुंओर अराजकता बलात्कार आम हो चुका है। जिस पर सरकार की नियंत्रण नहीं है। वर्तमान में खरीफ फसल धान की बोनी निकट है और किसानों को खाद, बीज उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जो सरकार कृषि नीति की असफलता है। भाजपा कभी किसानों की हितैषी नहीं रही है। इनके लिए कभी सड़क की लड़ाई नहीं लड़ी केवल हिसान हितैषी होने का डिडोरा पिटती है। आज समूचे प्रदेश में खाद, बीज की संकट है, जिसे तत्काल दूर करने की आवश्यकता है।

सोसायटी में राखड़ खाद 42.80 टन, यूरिया 77.04 टन, पोटास 20.05 टन तथा एमपीआर खाद 31.05 टन की आपूर्ति की गई है।

साथ ही सरना धान 500 पैकेट का वितरण किया जा चुका है, जबकि किसानों को अब तक लगभग 5 करोड़ से भी अधिक की केसीसी ऋण वितरण की जा चुकी है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार की 31 सौ रूपए में 21 क्वटल धान खरीदी की योजना ने प्रदेश में

खरीफ फसल धान की पैदावारी को काफी प्रोत्साहित किया है तथा प्रदेश में धान का रकबा भी बढ़ा है परंतु पूर्व वर्ष के भांति इस वर्ष सरकार व प्रशासन किसानों को समय रहते खाद, बीज उपलब्ध नहीं करा पायी है। जिससे किसानों में नाराजगी देखी गयी है। वहीं को खाद, बीज की चिंता सताने भी लगी है। ऐसे में अब मानसून आने के पूर्व सभी सोसायटी में खाद, बीज की भारी किल्लत को दूर करना सरका की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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