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August 4, 2026 11:20 am

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द राम भक्त

सनातन मर्यादा का प्रतीक

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“झिरिया की सड़कों पर फूटा गुस्सा… 300 गौवंश की मौत पर मौन क्यों सरकार…?”

“झिरिया की सड़कों पर फूटा गुस्सा…

300 गौवंश की मौत पर मौन क्यों सरकार…?”

बेमेतरा – नवागढ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम झिरिया आज सिर्फ एक गांव नहीं…

बल्कि सत्ता से सवाल पूछता हुआ वो आईना बन चुका है,

जहां किसानों की बर्बाद फसलें…

मरी हुई गौमाताओं की तस्वीरें…

और टूटे हुए वादों की गूंज एक साथ सुनाई दे रही है।

एक तरफ मंचों से गौसेवा के बड़े-बड़े दावे…

दूसरी तरफ कथित तौर पर 300 गौवंश की अकाल मृत्यु और दर्जनों गांवों के किसानों की बर्बाद होती मेहनत…!

 

*सवाल यही उठ रहा है*

 

क्या गौमाता सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं…?

और क्या किसान सिर्फ चुनावी नारों का हिस्सा बनकर रह गया है…?

“जूस पिलाकर खत्म करवाई हड़ताल… फिर वादे कहां गए?”

बीडीसी दीपक सिंह दिनकर ने किसानों और ग्रामीणों की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी।

तब Bisheswar Patel ने मंच पर पहुंचकर व्यवस्थाएं सुधारने और समाधान का आश्वासन दिया था।

हड़ताल खत्म हुई…

लेकिन गांव वालों का आरोप है कि समय बीत गया, हालात नहीं बदले।

फसलें उजड़ती रहीं…

गौवंश मरते रहे…

और प्रशासनिक फाइलों में सिर्फ आश्वासन घूमते रहे।

“जब अर्थी निकली… तो राजनीति की चिंगारी भड़क उठी”

अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गौ सेवा आयोग, सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान कुछ भाजपा समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी शुरू हो गई।

देखते ही देखते माहौल इतना गरमाया कि झिरिया की सड़कें रणभूमि में बदलती नजर आने लगीं।

एक तरफ सत्ता के खिलाफ आक्रोश…

दूसरी तरफ विरोध को रोकने की कोशिश…

हालात बिगड़ते उससे पहले पुलिस जवानों की मुस्तैदी ने बड़ी झड़प टाल दी।

 

*अब सवाल विरोध पर नहीं… व्यवस्था पर है*

 

इस मामले में लगभग 17 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर चंदनू थाना में एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है।

जिसमें देवेंद्र यादव, आशीष छाबडा, गुरु दयाल सिंह बंजारे सहित 17 लोगों का नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

लेकिन अब गांव-गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है—

“एफआईआर विरोध पर हुई…

पर 300 गौवंश की मौत पर जवाबदेही कब होगी…?”

“किसानों की बर्बाद फसलों का हिसाब कौन देगा…?”

तीखा तंज

 

*गौमाता के नाम पर राजनीति करने वालों, अब गांव तुम्हारी हकीकत पूछ रहा है…अगर सब ठीक था…*

 

तो किसान सड़क पर क्यों बैठा है…?

और अगर किसान झूठ बोल रहा है…

तो फिर वादों का मंच क्यों लगाया गया था…?”

 

“नारे थे गौसेवा के, तस्वीरें लाशों की निकली,वादों की राजनीति आखिर फिर कागज़ों में सिमटी…

 

जब किसान ने सवालों की मशाल उठाई हाथों में,

तो सत्ता ने जवाब नहीं… एफआईआर लिखी…”

Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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