विकास की राजनीति या फिर नवागढ़ क्षेत्र के विनाश की पटकथा तो नही लिखी जा रही… हर्ष बघेल युवा अध्यक्ष नवागढ ब्लाक

*सम्बलपुर में युवा कांग्रेस के नेतृत्व मे हुए प्रदर्शन व पुतला दहन को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष अजय साहू के प्रतिक्रिया पर हर्ष बघेल की तिखी प्रतिक्रिया*
रायपुर – बेमेतरा / नवागढ़ की सियासत में इन दिनों सवालों की आँधी चल रही है—और इस आँधी में सच क्या है, दिखावा क्या है, ये समझ पाना आम जनता के लिए आसान नहीं रह गया है। मुद्दा है कथित “गुंडागर्दी” और उस पर पर्दा डालने के आरोपों का। सवाल उठ रहा है—क्या यह विकास की राजनीति है या फिर नवागढ़ क्षेत्र के विनाश की पटकथा लिखी जा रही है?
“आँखों में धूल झोंकना” कोई नई बात नहीं, लेकिन जब जनता ही पूछने लगे कि आखिर “दाल में काला है या पूरी दाल ही काली है?”, तब मामला गंभीर हो जाता है। युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष हर्ष बघेल ने खुलकर आरोप लगाया है कि विधायक प्रतिनिधि पारस वर्मा के इर्द-गिर्द हो रही घटनाओं को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि सब कुछ सही है, तो फिर सच सामने आने से डर क्यों?
अब बड़ा सवाल ये—
क्या नवागढ़ में कानून का राज है या “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है?
क्या प्रशासन की चुप्पी किसी बड़े खेल का इशारा है?
या फिर यह सब केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने का जरिया बन चुका है?
वहीं, भाजपा जिला अध्यक्ष अजय साहू की प्रतिक्रिया भी “नपा-तुला जवाब” ही नजर आई। उन्होंने सीधे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दैनिक आखबारो में नवागढ में विकास और विधायक की लोकप्रियता से बौखला गए है कांग्रेसी कह कहने वाले भाजपा जिलाध्यक्ष अजय साहू सम्बलपुर मे विधायक प्रतिनिधि पारस वर्मा के कथित गुंडागर्दी को छुपाने विकास करने की बात कह आम जनता को बहकाने का प्रयास ना करे भाजपा जिलाध्यक्ष अजय साहू जी आपकी और आपकी पार्टी की कथनी और करनी स्पष्ट रुप से जनता सब देख रही है जिसे आने वाले विधानसभा चुवाव मे जनता करारा जवाब देने काफी आतुर है। तथ्यों के आधार पर ही बात होनी चाहिए।” लेकिन सवाल ये उठता है कि—क्या यह प्रतिक्रिया वास्तव में जवाब है या सिर्फ “आग में घी डालने से बचने” की रणनीति?
जनता के बीच अब चर्चा है—
क्या सच को दबाने की कोशिश हो रही है?
क्या राजनीतिक रस्साकशी में नवागढ़ का विकास कहीं पीछे छूट गया है?
और सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब तक “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” वाली राजनीति चलती रहेगी?
नवागढ़ की सड़कों से लेकर चौपाल तक, एक ही चर्चा गूंज रही है—“हकीकत क्या है?”
अगर आरोप गलत हैं, तो खुलकर जांच क्यों नहीं?
और अगर सही हैं, तो कार्रवाई कब?
क्योंकि आखिर में, “सच्चाई को जितना दबाओ, वो उतनी ही जोर से बाहर आती है।”
अब देखना ये है कि यह मामला सच की रोशनी में आता है या फिर राजनीतिक अंधेरे में ही गुम हो जाता है…?


