खास खबर..सुरक्षित मातृत्व के दावों की खुली पोल—चंदनू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव सुविधा पर उठने लगे सवाल…

बेमेतरा – सरकार सुरक्षित प्रसव और मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है…नारे दिए जाते हैं, योजनाएं चलाई जाती हैं…लेकिन जब हकीकत सामने आती है, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। बेमेतरा जिले के चंदनू स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है,
जहां प्रसव के लिए आई ग्रामीण महिलाओं और मितानिनों को सुविधाओं के अभाव में वापस लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, केंद्र में ना पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध थे, ना ही जरूरी नर्सिंग स्टाफ, जिसके कारण प्रसव जैसी गंभीर सेवा भी प्रभावित होती दिखी।
सरकार लगातार संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) को बढ़ावा देने की बात करती है,ताकि मातृ और शिशु मृत्यु दर कम हो सकेगा। जब अस्पताल में ही सुविधा उपलब्ध नहीं होगी,तो सुरक्षित प्रसव का सपना कैसे पूरा होगा…?
*कागज मं सब चमचमाथे, फेर हकीकत मं हालत दम तोड़ देथे…*
और लोग कह रहे हैं
*जेन ला सेवा देय के जिम्मा, ओही मन गैरहाजिर*
त भरोसा काबर रह जाही…?क्या सरकारी दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं…?
क्या जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं…? या फिर व्यवस्था में लापरवाही और अनियमितता की अनदेखी हो रही है…? क्या मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ रहा है…?
“सुरक्षित प्रसव – हर माँ का अधिकार”
“अस्पताल में प्रसव, माँ और बच्चे का जीवन सुरक्षित”
“संस्थागत प्रसव अपनाएं, खतरे को दूर भगाएं क्या ये नारे जमीनी स्तर पर सच बन पा रहे हैं…?
“नारे गूंजत हावय हर गली-मोहल्ला मं,फेर अस्पताल मं सन्नाटा काबर दिखथे…जेन जगह ले भरोसा मिलना चाही,ओही जगह सवाल काबर उठथे…”
फिलहाल चंदनू स्वास्थ्य केंद्र की यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान दें और जमीनी हकीकत सुधारें। अब देखना होगा क्या इन सवालों पर कार्रवाई होगी,
या फिर ये मामला भी सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाएगा…।


