बाल विवाह पर लगाम में नाकामी? गांवों में जारी परंपरा, जिम्मेदारों की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल…

बेमेतरा जिले के ग्रामीण अंचलों से लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जहां बाल विवाह की घटनाएं अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहीं। कानून सख्त होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर रोकथाम की व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदार विभाग केवल कागजों में सक्रिय हैं?
*जमीनी हकीकत ग्रामीण क्षेत्रों में*
नाबालिग लड़के-लड़कियों की शादी धड़ल्ले से हो रही
प्रशासन को सूचना मिलने के बावजूद समय पर हस्तक्षेप नहीं
कई मामलों में रात के समय या गुपचुप तरीके से विवाह
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई हो, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
*कानून क्या कहता है*
भारत में बाल विवाह पूरी तरह प्रतिबंधित है:
लड़कियों की न्यूनतम उम्र: 18 वर्ष
लड़कों की न्यूनतम उम्र: 21 वर्ष
उल्लंघन पर सख्त सजा और जुर्माना
इसके बावजूद, जागरूकता और निगरानी की कमी से कानून का असर कमजोर पड़ रहा है।
*जिम्मेदार विभागों पर उठ रहे सवाल*
महिला एवं बाल विकास विभाग
प्रशासनिक अधिकारी
पंचायत और स्थानीय तंत्र
इन सभी की भूमिका अहम है, लेकिन आरोप है कि:
फील्ड विजिट और निगरानी कम
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं
केवल औपचारिकता निभाई जा रही
“एसी ऑफिस से बाहर निकलना महंगा पड़ रहा”—यह तंज अब आम चर्चा का हिस्सा बनता जा रहा है।
*समाज पर असर*
बच्चियों की शिक्षा बाधित
कम उम्र में स्वास्थ्य जोखिम
गरीबी और अशिक्षा का दुष्चक्र मजबूत
*क्या होना चाहिए*
गांव स्तर पर निगरानी समितियों को सक्रिय करना संदिग्ध विवाह की सूचना पर तत्काल टीम भेजना आंगनबाड़ी, शिक्षक और पंचायत की संयुक्त जिम्मेदारी तय जनजागरूकता अभियान को प्रभावी बनाना दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई
*बड़ा सवाल*
जब कानून है, तंत्र है, योजनाएं हैं—तो फिर बाल विवाह रुक क्यों नहीं रहा? क्या जिम्मेदारों की निष्क्रियता ही इसकी सबसे बड़ी वजह है?
*जनहित की अपील*
बाल विवाह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ समझौता है। अब समय है कि प्रशासन कागजों से निकलकर जमीन पर सक्रियता दिखाए, तभी इस कुप्रथा पर सच में रोक लग पाएगी।
वर्जन
91316 57287
मनोरमा साहू
परियोजना अधिकारी बेमेतरा,
*वर्जन*
94076 84308
चंद्रबेस सिसोदिया
जिला परियोजना अधिकारी बेमेतरा,


