बेईमानों की खुली पोल, जांच के नाम पर अब नौटंकी का खेल, किसी की आह और बदुआ तो नही ? एक बर्बादी का संकेत…

*खुद में खामियां हैं और दूसरों से जलते हैं चेहरे धो नहीं सकते और आईना बदलते हैं*
बेमेतरा – चंदनू – द राम भक्त – यह वाक्य उतना ही हकीकत है जितना की सेवा सहकारी समिति चंदनू के सहायक प्रबंधक व फड प्रभारी व कार्यरत कर्मचारियों की हकीकत तस्वीर जब उजागर होने लगा तो वह इस कदर बौखला गए और बीच बचाव करने के लिए हाथ पाव फुलने लगे और बीच बचाव करने के लिए जांच कर्ता अधिकारियों पर सवाल उठा रहे है। की धान खरीदी के एक माह बाद आखिर जांच क्यो…? ऐसा कहकर अपनी कमजोरीयों पर पर्दा डालने वाले अब राजनीती के चौखट पर नाक रगडने मे लगे हुए है साथ फरियाद लगा रहे है बोली लगा रहे है बचा लेने रहम की भीख मांग रहे है। यदि सहायक प्रबंधक व उनके कर्मचारी सही हैं तो जांच में संकोच क्यों..? और जब बेईमानी और भ्रष्टाचार.. सब उजागर होने लगा तो गिडगिराने लगे । देर ही सही अंधेर तो नहीं होगा जांच मे सब होगा बेनकाब। वो लग्जरी गाड़ी बीच रास्ते पर लाखों की मकान, बेशुमार संपत्ति की रहस्य क्या..? वर्तमान और पूर्व की स्थिति कैसी थी..? क्या यह जांच का विषय नहीं..? आखिर जांच पर अधिकारियों पर सवाल उठाने वाला बेईमान कौन..? इतनी बड़ी साजिश आखिर अकेले कैसे कर सकता है इतनी बडी अमानक धान की खरीदी..? सभी होंगे दोषी.ऐसे बेईमानों पर एफआईआर दर्ज ही नहीं बल्कि भविष्य मे समितियों से बाहर का रास्ता दिखाया जाए, ताकी जितनी भी नुकसान समिति को हुआ है उसकी भरपाई भी बेईमानी से की गई कमाई संपत्ति से अर्जित करनी चाहिए।
*एक सवाल गलत नही तो जांच कराने मे संकोच कैसा..? सत्य है पर कडुवा है*
गलत नहीं तो जांच में संकोच कैसा..? एक मत होकर समस्त कर्मचारी जमकर भ्रष्टाचार तो नही किया..? समिति में कर्मचारियों की लापरवाही सारे हदे पार, अन्याय से कमाया हुआ धन वंश का पाई पाई का होगा हिसाब। क्यो भुल गए बेईमान, दुनिया के सृजन हार मालिक जब करता है न्याय तो तख्ता पडत देता है। क्या सरकार को चूना लगाने समस्त कर्मचारियों की थी सहमति। यदि ऐसा नही तो समिति में कार्य करने से पहले और अब उनके आर्थिक बदलाव का भी जांच होनी चाहिए कि कितना गोलमाल कितना बेईमानी और कितना गबन साफ-साफ देखा जा सकता है जांच करवाने पर छूट रहे पसीने… हकीकत से पर्दा उठाते ही भ्रष्टाचार की परत खुलती ही जा रही है। समिति आने के बाद ऐसा क्या चमत्कार किया कि लाखों करोड़ों की संपत्ति कैसे कर ली तैयार जांच का विषय।
*काले कारनामे को छुपाने जांच कर्ता पर आरोप का षड्यंत्र…हकीकत तस्वीर जनता के बीच*
चंदनू समिति प्रभारी और कर्मचारीयों को FIR की धमकी व मां बहन की गंदी गाली-गलौज और पड़ताड़ित करने का आरोप लगाना महज एक दिखावा और अपने काले कारनामे को छुपाने का षड्यंत्र की हकीकत तस्वीर जनता के बीच किसी से छुपा नही जिनकी हैसियत नही घर से निकलने की वह लगजरी गाडी और आलीशान बगला ईमानदारी की कमाई से हो तो नही सकती..? हकिकत है की जो बेईमानी से कमाएगा लोगो से छल कपट से सम्पत्ति छिनेगा वह कितने दिन सुखी के साथ जीवन जी सकता है उपर वाले के घर देर है अंधेर नही जो कमाया है वह भी गर्म तवे मे एक बुंद पानी डालने से जिस तरह समाप्त हो जाता है वैसे ही छल कपट बेईमानी और गब्दारी से की गई सम्पत्ति निकल जाती है। ऐसे बेईमानो को बचाने वाले व उनके काली कमाई को सह देने वाले से बडा बेईमान और कौन हो सकता है..? जिनको इतनी भी समझ नही जो हर पल गिरगिट की तरह अपने रिस्ते मे रंग बदलकर डसने का काम करने वाले आखिर कब तक बचे रहेगे एक दिन जरूर इंशाफ होता ही है। और जो हो रहा है वे भी उनके अच्छे बुरे बर्ताव व उनके द्वारा रिस्ते में छल कपट और बेईमानी कर कमाया हुआ सम्पत्ति का एक नजारा है जिसे प्रकृति मूल ब्याज के साथ वशूलना शुरू कर दिया यह एक बडा संकेत है सम्हल जानी चाहिए और छल कपट को कबूल कर लेनी चाहिए क्यो शरण के गया व्यक्ति को मरण नही मिलता बडे बुजुर्ग कहा करते है।


