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August 4, 2026 9:07 pm

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सनातन मर्यादा का प्रतीक

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कागजों पर पानी की सप्लाई… जमीनी धरातल पर प्यासे ग्रामीणों की बदहाल स्थिति… जवाब दो साहब 

कागजों पर पानी की सप्लाई… जमीनी धरातल पर प्यासे ग्रामीणों की बदहाल स्थिति… जवाब दो साहब 

 

*जल जीवन मिशन बेमेतरा जिले के कई ग्राम पंचायतों में अधर में लटकी पेयजल योजना… जिम्मेदारों की चुप्पी ठीक नहीं*

 

 

 

 

 

बेमेतरा – केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायतों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए पानी टंकियों का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का काम लगभग पूरा होने की बात कही जा रही है लेकिन मौके पर पहुंच कर देखा जाय तो योजना का मकसद सिर्फ एक दिखावे से कम नहीं लोग आज भी दर्जनों गांवों

की महिलाए और बच्चे दूर-दराज जल स्त्रोतों से पानी ढोने की मजबूरी हालात से गुजर रहे हैं। जिनसे उनको आज तक मुक्ति नहीं मिल पाया यह एक बड़ा सवाल है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई गांवों में ढांचा तैयार होने के बावजूद अब तक नलों में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है, जिससे

ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदार की उदासीनता के कारण करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी पाइपलाइन बिछी, पर सड़कों की मरम्मत नहीं और योजना अधर में लटकी हुई है। और ग्रामीण का कहना है कि पानी टंकियां तैयार हैं और पाइपलाइन भी बिछा दी गई है, मगर तो समुचित परीक्षण किया गया और ही समय पर कनेक्शन चालू किए गए लेकिन कहीं मोटर पंप अधूरे पड़े हैं तो कहीं बिजली कनेक्शन का काम अब तक लंबित है। नतीजतन लोग आज भी पुराने कुओं, हैंडपंपों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। कई गांवों में निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। और कहीं मोटर पंप खराब तो कहीं पाइपलाइन लीकेज है सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन का और कब तक ग्रामीणों ने रखेंगे आस और विश्वास..? पाइपलाइन डालने के दौरान कई गांवों की सीसी सड़कों को तोड़ा गया, लेकिन काम पूरा होने के बाद उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। कई मोहल्लों में सड़कें उखड़ी पड़ी हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि टूटी सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और जिन गांवों में पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई है, वहां तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि अधिकारियों की घोर लापरवाही स्वीकार्य योग्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन गांवों में जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है, वहां जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि लोगों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।

और काम कब शुरू हुआ और कब पूरा होना था। इससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और संभावित अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ रही है।

ग्राम पंचायत कुरवा के ग्रामीण ने हमारे संवाददाता को बताया की बड़ी मस्क्कत से आम नागरिकों के किचड़ से लथपथ रास्ते को सीसी रोड का निर्माण कर रास्ता सुगम बनाया गया किंतु नल जल योजना में कार्यरत ठेकेदार बगैर पंचायत से अनुमति लिए खुदाई कर पाईप लाइन बिछाया गया ताकी लोगों को पेय जल की आपूर्ति हो सके लेकिन आज तक रोड रिपेयर नही कराया गया और पानी कि समस्याओं से निजात भी नहीं मिली। यह कैसी योजना जिनके निर्माण के लिए एक निर्माण कार्य को तोड़कर अपनी जिम्मेदारी भूल जाना क्या यही है जल जीवन मिशन जो ग्रामीणों का समस्याओं का समाधान नही और जिम्मेदार कि ध्यान नही, ठेकेदार कों बोलने के बाद भी सुधार नही कर पा रहे है ऐसे ठेकेदार के ऊपर क्यों कार्यवाही नही हों पाया क्या विभागीय अधिकारियों को ग्रामीण आम नागरिकों की समस्यायों से कोई लेना-देना नहीं। क्या उक्त ठेकेदारों को खुली छूट दे रखी है। क्या उन कामचोर ठेकेदारों को निर्माण कार्य को तोड़कर अपना कार्य करने के बाद आखिरकार क्यों भूल जाते हैं की यह लोगों की चलने का एक मात्र सुगम रास्ता है। अंधेरे में लोगों गिरने से गम्भीर चोट या बड़ी हादसा होने का खतरा हो सकता है इन बातों को क्या दरकिनार कर दिया जा रहा है। कहीं ना कहीं संरक्षण दिया जा रहा है जिनके कारण ठेकेदार बेखौफ होकर गांव के मुख्य मार्ग को तोड़कर अधूरे छोडकश्र भाग खड़े हुए हैं।

 

 

पाइपलाइन डालने के दौरान कई गांवों की सीसी सड़कों को तोड़ा गया, लेकिन काम पूरा होने के बाद उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। कई मोहल्लों में सड़कें उखड़ी पड़ी हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि टूटी सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और जिन गांवों में पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई है, वहां तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। उमाशंकर दिवाकर ने कहा कि अधिकारियों की घोर लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन गांवों में जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है, वहां जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि लोगों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके। और काम कब शुरू हुआ और कब पूरा होना था। इससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और संभावित अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ ।

Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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