तसल्ली
——————-
ताला की चाबी,
मिथुन की भाभी,
धर्मेंद्र की सास,
पानी नहीं बरस रहा,
किसान है उदास,
किसान है उदास।
हे इंद्रदेव वर्षा करो,
ऐसा कि पत्थर में भी,
फूल खिल जाए,
किसानों को,
तसल्ली मिल जाए,
तसल्ली मिल जाए।
सोना चांदी हीरा मोती,
कुछ काम न आएगा,
अरे धरती में फसल,
जो नहीं उपजेगा तो,
मनुष क्या खायेगा।
दलहन तिलहन को किसान,
समय पर खेत में बोता है, बारिश अच्छी नहीं हुई तो,
सर पकड़ रोता है,
सर पकड़ वह रोता है।
— अनिल कुमार मौर्य अनल
शासकीय प्राथमिक शाला बागोड़ार


