कंकाल में तब्दील गौ वंश व नील बदैयलीन गाय…ना चारा,ना पानी सुशासन पर भी शिकायत पर कार्यवाही महज दिखावा… जिम्मेदार अफसरों पर हो कड़ी कार्यवाही…
बेमेतरा – गौ वंश की सुरक्षा को लेकर नए-नए संगठन तो बन जाते हैं किंतु बनने के बाद में सिर्फ अपनी रोटी सेंकते हैं किंतु हकीकत यूं कहें कि जिम्मेदारों की कमी है और जिम्मेदारियों की कमी के वजह से गौवंश की रक्षा करना कहीं दिखाई नहीं देता है और ना ही स्थिति देखने को मिल रहा है कंकाल में तब्दील गौवंश कि तस्वीर जिसे देखकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जयेंगे। ना चारा ना पानी कैसे बचा पाएंगे अपनी जीवन गौ वंश देखकर इस तस्वीर इस बात को स्पष्ट बया करता है कि प्रशासनिक उदाशीनता के वजह से गौवंश खतरे में है सैकड़ो गाय को वन विभाग के द्वारा बनाए गए 1 सौ 57 एकड़ की जमीन पर घेराबंदी करके डाल दिया गया किंतु चारे और पानी की व्यवस्था नहीं होने के वजह से गौ वंश की मौत का तांडव देखकर रूह काप जाती है। सोचिए अभी बरसात का सीजन चल रहा है हरा चारा तो मिल रहा हूं पानी भी मिल रहा है। किन्तु प्राप्त नहीं है । जरा सोचिए की भीषण गर्मी में आम लोगों को पीने के पानी के लिए लम्बी कतार लगाकर पानी लाना पड़ता था।किंतु यह मौसम यदि गर्मी का रहे तो उस दौरान में एक बूंद पानी के लिए इंसान को घूमना पड़ा तो मवेशी तार जाली अंदर है वह बाहर अपनी प्यास बुझाने के लिए कैसे आते, मवेशियों की कंकाल तस्वीर को देखकर आप अनुमान लगाए की किस तरीके से उनके साथ में स्वार्थी लोगों ने अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए कितनी कूटनीति और रणनीति अपनाई होगी आज गोवंश खतरे में है किसी को दिखाई नहीं दे रहा है और ना ही लोग सुध भी ले रहे हैं। आखिर जिम्मेदारी किसकी है मवेशियों की सुरक्षा को लेकर नित नए-नए कानून सरकार बना रहे हैं किंतु सुरक्षा का नजर कहीं देखने को नहीं मिल रहा है लाखों करोड़ों रुपए गांव सेवा आयोग पर खर्च कर दिए जाते हैं किंतु मवेशियों की सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं लेता गारंटी के नाम पर सिर्फ दिखावे का खेल चलता है आखिर कब तक उनके नाम पर लोग अपनी स्वार्थ सिद्ध करते रहेंगे।
सुशासन दिवस पर भी ग्रामीणों ने लगाई थी कलेक्टर को गुहार किंतु कार्यवाही के नाम पर महज लोगों को छला गया है नतीजा मवेशियों की खुली आसमान के नीचे मौत हो जाना और कंकाल में तब्दील हो जाना इस बात की गवाही देता है कि प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही चरम सीमा पार हो गई कहीं ना कही सुशासन के नाम पर सिर्फ आम लोगों को बेवकूफ बनाया गया है कार्यवाही के नाम पर आम जनता को छला गया है और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया गया।
*प्रशासन की उदासीनता और गौ वंश की रक्षा पर उठ रहे सवाल का कौन देगा जवाब…*
गांव सेवा आयोग के अलावा ग्रामीण अंचलों पर गौ सेवक के रूप में कार्य करने वाले लोगों की तादात बढ़ती नजर आ रही है किंतु हकीकत यह है कि गौ वंश की ना तो सुरक्षा कर पा रहे हैं ना ही उसका समुचित व्यवस्था अनुशासन कर पा रही है ना प्रशासन न आम जनता क्योंकि आम जनता स्वार्थ में डूब चुके हैं और अपने आप को स्वच्छ और सुंदर बनाने के चक्कर में मवेशियों की गोबर उठाने में घिन आता है। नतीजन घर में रखे पशुओं को खुला छोड़ दे रहे हैं और वही पशु आवारा और घुमंतू बन रहा है ऐसे पशु किसानों के खेतों में लगे खून पसीने की उपज फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहे है।
नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत झिरिया सहित दर्जनों गांवों के किसानों की खड़ी फसल नुकसानी मवेशियों से बचाने के लिए क्षेत्र के किसानों ने घुमंतू मवेशियों को वन विभाग द्वारा बनाए गए 1 सौ 57 एकड़ भूमि पर कब्जा कर फेंसिंग पोल व तार जाली लगाकर घेरा करके रखा गया है किंतु चारा पानी की व्यवस्था नहीं होना एक बड़ी लापरवाही के वजह से सैकड़ों गाय भुखे पेट दम तोड दिया और कंकाल में तब्दील हो गए। आखिर किसानों ने अपनी फसल नुकसानी के लिए जिला प्रशासन को सुशासन दिवस पर लिखित शिकायत करके उचित व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई। किन्तु ना किसानों की फसल बचा पाने व मवेशियों को बचाने नाकाम नजर आए ।
*सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर खुले आसमान के नीचे मवेशियों की बिखरी कंकाल…*
वजह जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे आपको बता दूं कि किसान अपनी फसल बचाने के लिए झिरिया उसलापुर,आंदू,घठोली,पौसरी सोनपुरी,चंदनू,रवेली, सहित अन्य गांवों के किसान घुमंतू मवेशियों को वन विभाग के द्वारा बनाए गए नर्सरी पर अंदर घुमंतू मवेशियों को डाल दिए उक्त वन विभाग के भूमि पर ना तो समुचित रूप से खाने के लिए ना पैरा और पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से सैकड़ो पशु खाने पानी के अभाव में कंकाल में तब्दील हो गए। किसान अपनी फसल तो बचा ली है किंतु गोवंश को बचाने के लिए आखिर कार जिम्मा किसका है।
*दर्जनों गांव है प्रभावित सुरक्षा व्यवस्था महज एक दिखावा…*
मवेशियों से होने वाले फसल नुकसानी से बचाने के लिए आधा दर्जन से भी अधिक गांव प्रभावित है जिनकी खून पसीने के द्वारा उपजाई गई फसल को एक ही बार में फसल चौपट कर देते हैं ऐसे घुमंतू मवेशियों को समुचित व्यवस्था करने के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर वन विभाग के द्वारा बनाए गए नर्सरी के अंदर रखा गया किंतु चारे पानी की व्यवस्था नहीं होने से युक्त सैकड़ो मवेशी कल के मुंह में समा गया क्योंकि ना खाने और पीने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से मवेशी कंकाल में तब्दील हो गई। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सिर्फ महक दिखावे का खेल आम लोगों के अलावा साथ-साथ गौ सेवा आयोग के जिम्मेदारों पर भी सवाल उठते नजर आ रही है।
*सुशासन में लिखित शिकायत किंतु कार्यवाही सिर्फ महज दिखावा…*
आसपास के आधा दर्जन से भी अधिक गांव के लोगों ने लिखित शिकायत कर कलेक्टर से फरियाद लगाई और घुमंतू मवेशियों को एक जगह समुचित तरीके से रखने के लिए गुहार भी लगे जिससे किसानों के होने वाली फसल नुकसान से बचा जा सके किंतु सरकार ना तो फसल बचाने में सफल रही ना ही मवेशी को बचाने में सफल नजर आ रही है दोनों स्थिति में फैलियर नजर आ रही है किसान काफी परेशान है मवेशियों की मौत को लेकर काफी संवेदनशील होने के बजाय सिर्फ एक मुख बधिर के रूप में लोग देख रहे हैं और अपनी खुली आंखों में इस मंजर को देखकर सिर्फ झूठी आश्वासन देकर लोगों के सहानुभूतियों के साथ में खिलवाड़ करने का कार्य किया जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन किस तरीके से व्यवस्था करते हैं और मृत मवेशियों के शव को क्या करेंगे यह एक बड़ा सवाल है।


