नवागढ़ शराब दुकान में मिलावट का हुआ खुलासा, प्लेसमेंट एजेंसी पर आरोप

*मिलावटी शराब मामले में कर्मचारी फंसे, पर असली मालिक अब भी गिरफ्त से बाहर*
द रामभक्त बेमेतरा – बीते रविवार सुबह आबकारी विभाग का उड़न दस्ता नवागढ़ शराब दुकान पर पहुंचा तो दुकान में हड़कंप मच गया। बोतलें खोली गईं तो शराब से ज्यादा पानी निकला। मौके से सात पेटी यानी 336 पौवा मिलावटी शराब जब्त की गई और सभी नौ कर्मचारियों पर आबकारी अधिनियम की धारा 138 समेत अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज हुआ।
*लिखित शिकायत पर कार्यवाही आखिर क्यों नहीं एक बड़ा सवाल*
लेकिन कार्रवाई यहीं थम गई और मामला केवल कर्मचारियों तक ही सीमित रह गया। शराब में पानी मिलाने के कांड में नया मोड़ सामने आ रहा है। हमारी मीडिया मित्र टीम ने कर्मचारियों के लिखित बयान की कापी हासिल किए जिसमें कार्रवाई के बाद कर्मचारियों ने
*कर्मचारी फंसे, समन्वयक अब भी सुरक्षित*
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि पिकरी शराब दुकान सहित कई मामलों में पहले भी कर्मचारियों ने प्लेसमेंट पर इसी तरह के आरोप लगाए थे। लेकिन तब भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब एक बार फिर वहीं स्थिति है कर्मचारियों के लिखित बयान के बावजूद जिला समन्वयक पर न तो नोटिस जारी हुआ और न ही कोई जांच शुरू हुई। लोगों का कहना है कि नवागढ़ तो बस ट्रेलर है। जिलेभर की शराब दुकानों में यही खेल लंबे समय से चल रहा है। सवाल यह है कि विभाग बड़ी मछलियों पर हाथ डालने से क्यों बच रहा है। क्या चुप्पी ही संरक्षण का दूसरा नाम है?
*निष्पक्ष जांच कराए*
ग्राहकों का व्यंग्य भी कम नहीं। एक बोतल हाथ में लिए ग्राहक ने कहा हम इतने दिनों से शराब नहीं, धोखा पी रहे थे। बोतल खोलते ही नशा उड़ जाता था और पानी का स्वाद रह जाता था। असली नशेड़ी हम नहीं, यह सिस्टम है। जब कर्मचारी लिखित रूप से दबाव का आरोप लगा रहे हैं तो विभाग की जिम्मेदारी है कि निष्पक्ष जांच कराए। लेकिन केवल कर्मचारियों पर गाज गिराना और बड़े नामों पर चुप रहना, विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जनता का सवाल अब बिल्कुल साफ है जिले का आबकारी विभाग आखिर किसके दबाव में और किसे संरक्षण दे रहा है? इस मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों से आगे की कारवाई पर पूछने पर विभाग ने चुप्पी साध ली।


