शिक्षा दिवस पर राष्ट्रपति से पुरस्कृत शिक्षक ने लिखी छत्तीसगढी कविता….. एक बार अवश्य पढे
छोटे गुरू जी बड़े गुरूजी
सबो झी ल जयराम गुरूजी
मंझिला गुरूजी नवा गुरूजी
मोर डहर ले सतनाम गुरूजी
बाचे खोचे होही वहूला
सलाम गुरूजी —————
बछवा नटवा कस अदरा ल
सब ल तंय सिखोथस ।
कोढिया गरियार बपरा ल
सब ल ज्ञान म फूलोथस ।।
सिधवा हस निचट तंय
गरूवा सहीं सरू जी ————-
दिया सहीं बरथस तंय
तेल के राहत ले बाती ।
तोर पीरा हीरा के कोनो
हे का चिन्हैया छाती ।।
मिट्ठू सरी बासथस
तंय तपतकुरू जी ———–
लोहाटी के तेरा छेदरा
कस तंय हस पाना ।
कोनो म लहाथे
तंय लहिथस मस्ताना ।।
सोल कस फोसवा हस
तंय निचट हरू जी ————
बारा महिना म एक दिन
तोर मनाथें तिहार ।
बुक बुका के बंदन चंदन
तोर करदेथें जोहार ।।
आज भर के तंय हंडा
काली होबे जइसे चरू जी ———–
नेता अउ अफसर के
तंय सुघ्घर खाजी ।
कुछू काम करवा ले
रहिथस तंय राजी ।।
बांट- बांट अमरित ल
तंय पिथस करू जी ————
छोटे गुरू जी बडे गुरूजी
सबो झी ल रामराम गुरूजी
मंझिला गुरुजी नवा गुरूजी
मोर डहर ले सतनाम गुरूजी
बाचे खोचे होही वहूला
सलाम गुरूजी ——————
रचना
डॉ गोकुल बंजारे चंदन बेमेतरा छ ग
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