कलम की ताकत से समाज में नई चेतना: छत्तीसगढ़ कलमकार मंच ने रचा नया साहित्यिक इतिहास

*कानन पेंडारी में 5 पुस्तकों का भव्य विमोचन, 53 साहित्यकार सम्मानित; साहित्य, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के संगम का बना ऐतिहासिक मंच*
*साहित्य बना सामाजिक परिवर्तन का माध्यम*
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ कलमकार मंच, मस्तूरी के तत्वावधान में कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क में आयोजित पुस्तक विमोचन, काव्य-गोष्ठी एवं सम्मान समारोह साहित्यिक गरिमा, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक समरसता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान एवं राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार प्राप्त संस्था ने एक बार फिर साबित किया कि सशक्त लेखनी समाज में सकारात्मक परिवर्तन और नई सोच का मार्ग प्रशस्त करती है।
*प्रकृति की गोद में गूंजा साहित्य का स्वर*
कार्यक्रम की शुरुआत कानन पेंडारी जंगल सफारी भ्रमण से हुई। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच आयोजित काव्य-गोष्ठी में बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़ और अन्य जिलों से पहुंचे साहित्यकारों का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया गया। नवागढ़-बेमेतरा के सुप्रसिद्ध गायक-कवि जुगेश बंजारे ‘धीरज’ ने प्रभावी संचालन करते हुए भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया, जिसने कार्यक्रम को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ दिया।
*पांच पुस्तकों के विमोचन से समृद्ध हुआ साहित्य जगत*
करतल ध्वनि के बीच पांच पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें “अनुभूति” राष्ट्रीय साझा संकलन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें देशभर के 53 साहित्यकारों की रचनाएं और परिचय प्रकाशित हैं। इसके साथ ही डॉ. किशन टंडन ‘क्रांति’ की चार नई कृतियां—”दो बूंद स्याही”, “सोला आना सच”, “मेरी आवाज सुनो” और “हिजगा” का भी लोकार्पण हुआ। ये उनकी 78वीं से 81वीं प्रकाशित कृतियां हैं, जो उनकी निरंतर साहित्य साधना का प्रमाण हैं।
*कलमकार मंच ने बनाया नया कीर्तिमान*
संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. किशन टंडन ‘क्रांति’ ने बताया कि छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के बैनर तले अब तक 84 पुस्तकों का विमोचन हो चुका है, जो चार वर्षों के भीतर किसी साहित्यिक संस्था द्वारा स्थापित एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि लेखनी केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक बदलाव की सबसे बड़ी शक्ति है।
*53 साहित्यकारों का हुआ सम्मान*
कार्यक्रम में 53 साहित्यकारों को “साहित्य विभूति सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया। सम्मानित साहित्यकारों को सम्मान-पत्र, मेडल और पुस्तकें भेंट की गईं। इसके साथ ही मंच द्वारा सम्मानित साहित्यकारों की कुल संख्या बढ़कर 1544 पहुंच गई, जबकि यह संस्था का 27वां सफल आयोजन रहा।
*मुख्य अतिथि ने सराहा साहित्यकारों का योगदान*
मुख्य अतिथि एवं सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर विजय कुमार कोशले ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी दिशा तय करने वाली शक्ति भी है। उन्होंने अपने पुराने साहित्यिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि कविता और लेखनी लोगों के हृदय को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इस अवसर पर उनका भी सम्मान किया गया।
*कविताओं ने बांधा श्रोताओं का मन*
काव्य-गोष्ठी में विभिन्न जिलों से पहुंचे कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। तालियों की गूंज के बीच प्रकृति की गोद में सजे इस साहित्यिक आयोजन ने वहां भ्रमण करने पहुंचे लोगों को भी आकर्षित किया। राहगीर भी रुककर कविताओं का आनंद लेते रहे और साहित्यिक वातावरण का हिस्सा बने।
*लेखनी से समाज में जागरूकता की अलख*
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक समरसता, संविधान, मानवीय मूल्यों और जन-जागरण का संदेश दिया। यह आयोजन केवल पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच, संस्कार और परिवर्तन की नई चेतना जगाने का सशक्त प्रयास साबित हुआ।
*प्रदेशभर के साहित्यकारों की रही गरिमामयी उपस्थिति*
इस अवसर पर बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़ एवं बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों के साहित्यकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे ‘धीरज’, प्रचार सचिव मणिशंकर दिवाकर ‘गदगद’, डॉ. प्यारेलाल आदिले ‘तनय’, डॉ. गुलाब चंद ‘कुसुम’ सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। सफल संचालन जुगेश बंजारे ‘धीरज’ ने किया तथा आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
जब लेखनी समाज के हित में चलती है, तब वह केवल साहित्य नहीं रचती, बल्कि नई पीढ़ी के लिए विचार, संस्कार और परिवर्तन की मजबूत नींव भी तैयार करती है। छत्तीसगढ़ कलमकार मंच का यह आयोजन उसी सकारात्मक सोच का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।


