मेहनत ने बदली तकदीर: झिटिया की बेटी भूमिका देशमुख का ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालय में चयन, गांव-स्कूल ने किया भव्य सम्मान…

*95.33% अंकों और छात्रवृत्ति परीक्षा में शानदार सफलता के दम पर भूमिका ने रचा नया इतिहास, ग्रामीणों ने नगद पुरस्कार देकर बढ़ाया हौसला*
रायपुर/दुर्ग।
“सपनों की उड़ान तब और ऊंची हो जाती है, जब मेहनत को पूरे गांव का आशीर्वाद मिल जाए।” इसी कहावत को सच साबित किया है शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला झिटिया की होनहार छात्रा कु. भूमिका देशमुख ने। अपनी कड़ी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर उन्होंने प्रयास आवासीय विद्यालय, बिलासपुर में चयनित होकर न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे गांव और विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बुधवार, 22 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में शाला प्रबंधन समिति, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रमुखों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति में भूमिका का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया। विद्यालय परिवार ने उन्हें गुलदस्ता और स्मृति चिन्ह भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
संस्था के प्रधान पाठक आसकरण सिंह धुर्वे ने बताया कि भूमिका शुरू से ही मेधावी और अनुशासित छात्रा रही हैं। उन्होंने इस वर्ष 95.33 प्रतिशत अंकों के साथ कक्षा आठवीं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इतना ही नहीं, हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय सह साधन प्रवीण्य छात्रवृत्ति (NMMS) पात्रता परीक्षा में 121 अंक अर्जित कर चयन सूची में स्थान बनाया और विद्यालय का गौरव बढ़ाया।
भूमिका की सफलता से उत्साहित ग्रामीणों ने भी उनका मनोबल बढ़ाया। डॉ. उत्तम देशमुख (गोडमर्रा) ने ₹2000, प्रधान पाठक राजूराम देशलहरा ने ₹500, तथा शाला प्रबंधन समिति की अध्यक्ष श्रीमती मंजुलता यादव ने ₹500 सहित कुल ₹3000 की नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर सरपंच पुनीतराम राणा, एसएमसी अध्यक्ष मंजुलता यादव, उपसरपंच भागवत नायक, उपाध्यक्ष आनंद तारम, पूर्व सरपंच नरेंद्र वर्मा, ग्राम प्रमुख हिरदेराम साहू, ग्राम पटेल यादराम साहू, प्रधान पाठक आसकरण सिंह धुर्वे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षक, पालक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और भूमिका को शुभकामनाएं दीं।
भूमिका देशमुख की यह सफलता केवल एक छात्रा की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर इरादे मजबूत हों, मेहनत ईमानदार हो और शिक्षकों का मार्गदर्शन मिले, तो गांव की बेटियां भी बड़े सपनों को साकार कर सकती हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।


