“पेयजल के नाम पर खेतों में बोर की बारिश…? SDM कार्यालयों पर उठे गंभीर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा ‘बोर परमिशन खेल’?”

बेमेतरा।
जिले के बेमेतरा, साजा और नवागढ़ अनुभाग में बोर खनन अनुमति को लेकर अब प्रशासनिक व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ गई है। दुर्ग संभाग आयुक्त कार्यालय में की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित एसडीएम कार्यालयों द्वारा बिना विधिवत तकनीकी जांच एवं PHE विभाग की अनिवार्य अनुशंसा के खेतों और कृषि भूमि में धड़ल्ले से बोर खनन की अनुमति दी जा रही है।
शिकायत के अनुसार, पेयजल आवश्यकता का हवाला देकर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच तक नहीं की गई। नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम नेवसा और कुंवा सहित बेमेतरा ब्लॉक के ग्राम मोहरेन्हा में खेतों के भीतर बोर खनन होने की जानकारी सामने आने के बाद अब पूरे मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बोर अनुमति दिलाने के नाम पर आवेदकों से ₹5 हजार से ₹25 हजार तक वसूली किए जाने की चर्चा क्षेत्र में आम हो चुकी है। यदि यह आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—
क्या बिना तकनीकी जांच के भूजल दोहन की खुली छूट दी जा रही है…?
क्या खेतों में बोर खनन के नाम पर सरकारी नियमों का सौदा हो रहा है…?
क्या जिम्मेदार अधिकारी शासन की पारदर्शिता को ही चुनौती दे रहे हैं…?
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह बिना जांच और बिना वैधानिक प्रक्रिया के बोर अनुमति जारी होती रही, तो आने वाले समय में भूजल स्तर पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने दुर्ग संभाग आयुक्त से पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि सुशासन और पारदर्शिता का दावा करने वाला प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा…?
“जब प्यास के नाम पर नियम बिकने लगें,
तो सवाल सिर्फ पानी का नहीं, पूरी व्यवस्था का होता है…”


