गौ वंश, किसान और राजनीति” : नवागढ़ में उफान पर संघर्ष, प्रतीकात्मक अर्थी ने बढ़ाया सियासी तापमान…

बेमेतरा – छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला अंतर्गत नवागढ विधानसभा क्षेत्र की झिरिया पंचायत में इन दिनों गौ वंश और किसानों की फसल सुरक्षा को लेकर बड़े राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन चुकी है। करीब 300 गौ वंश और दर्जनों गांवों के किसानों की फसल नुकसानी के मुद्दे पर लगातार चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब उग्र राजनीतिक रूप ले लिया है।
जनहित और गौ हित की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे बीडीसी दीपक सिंह दिनकर के समर्थन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर सरकार, जिला प्रशासन और गौ आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
*आखिर विरोध किस बात का…?*
आंदोलनकारियों का आरोप है कि गौ आयोग, जिला प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने किसानों और गौ वंश सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन धरातल पर कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
किसानों का कहना है कि छुट्टा मवेशियों से फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं, जबकि दूसरी ओर गौ वंश भूख-प्यास से सड़कों और गांवों में तड़प रहा है। हड़ताल के दौरान मंच से तीखे राजनीतिक बयान भी सुनाई दिए। खुले मंच से एक वक्ता ने कहा—“आज अर्थी निकली है… और दस दिन बाद दसगात्र का न्योता भी दस दिन मे रखने की भी बात कही”
इस बयान के बाद माहौल और ज्यादा गरमा गया।
किसने साधा मंत्री पर निशाना…?
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने स्थानीय मंत्री दयाल दास बघेल पर सीधा हमला बोला।
*मंच से कहा गया कि….*
*“सत्ता का अंतिम दौर चल रहा है… आगामी चुनाव में जनता जवाब देगी… मंत्री जी विधानसभा क्षेत्र में दिखाई नहीं देंगे…”*
इतना ही नहीं, सरकार पर “राम और गौ माता के नाम पर राजनीति” करने का आरोप भी लगाया गया।
वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के समय गौ माता और धर्म की बात होती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद ना गौ वंश सुरक्षित है और ना किसान।
कौन-कौन पहुंचे समर्थन में…?
इस विरोध प्रदर्शन में देवेंद्र यादव भिलाई विधायक , आशीष छाबडा पूर्व विधायक बेमेतरा, गुरू दयाल सिंह बंजारे पूर्व विधायक नवागढ, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष बेमेतरा प्रांजल तिवारी,सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और युवा ब्लाक कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जो भी गौ वंश और किसानों के पक्ष में आवाज उठाता है, उसके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कर दबाने की कोशिश की जाती है।
भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, पुलिस के सामने नारेबाजी
प्रतीकात्मक अर्थी निकालने के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नारेबाजी हुई।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।
कांग्रेस कार्यकर्ता स्थानीय मंत्री दयाल दास बघेल , कृषि मंत्री राम विचार नेताम, जिला प्रशासन और गौ आयोग अध्यक्ष बिशेसर पटेल के खिलाफ नारे लगा रहे थे, वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने रास्ता रोककर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए।
*बड़ा सवाल आखिर जिम्मेदार कौन…?*
ग्रामीणों और किसानों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
आखिर 300 गौ वंश की मौत का जिम्मेदार कौन?
किसानों की फसल सुरक्षा कब होगी?
गौठान और गौ संरक्षण योजनाओं का वास्तविक लाभ कहां है?
क्या जनहित के मुद्दे अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह गए हैं?
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि किसानों और गौ वंश के अस्तित्व की लड़ाई है।
वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक ड्रामा बताकर विपक्ष पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस आंदोलन को सिर्फ राजनीतिक विरोध मानकर छोड़ती है या फिर गौ वंश और किसानों की समस्या का कोई ठोस समाधान भी सामने आता है।
*“राम नाम की राजनीति… और गौ वंश सड़कों पर बेहाल?”*
नवागढ़ में फूटा गुस्सा, प्रतीकात्मक अर्थी ने सत्ता से पूछे तीखे सवाल—
*“जो गौ माता के नाम पर सत्ता तक पहुंचे…आज वही क्यों गौ वंश की चीखों पर मौन बैठे…?”*
गौ वंश और किसानों की फसल सुरक्षा को लेकर उठी चिंगारी अब बड़ा जनआक्रोश बनती दिखाई दे रही है। करीब 300 गौ वंश की मौत, दर्जनों गांवों के किसानों की बर्बाद होती फसलें, और जिम्मेदारों की कथित वादाखिलाफी के खिलाफ बीडीसी दिपक सिंह दिनकर के नेतृत्व में जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब सत्ता की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल आखिर कौन सुनेगा…?
*“गौ माता के नाम पर वोट मांगने वाले…गौ वंश भूख-प्यास से मरते रहे तो आखिर जिम्मेदार कौन…?”*
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गौ आयोग, जिला प्रशासन और सत्ता में बैठे नेताओं ने सिर्फ आश्वासन दिए, लेकिन जमीन पर ना गौ वंश सुरक्षित हुआ और ना किसानों की फसल।
क्या सरकार को जानकारी नहीं कि गांव-गांव में छुट्टा मवेशी किसानों की मेहनत उजाड़ रहे हैं? क्या जिम्मेदारों को दिखाई नहीं देता कि बगैर चारा और पानी के गौ वंश तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहा है? या फिर सत्ता का मद इतना बड़ा हो चुका है कि अब जनता की पीड़ा सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई है?
*आखिर किसने कही यह बात*
*आज अर्थी निकली… दस दिन बाद दसगात्र होगा…”*
प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा के दौरान मंच से एक तीखा बयान सामने आया जिसने पूरे इलाके की राजनीति गरमा दी।
*खुले मंच से कहा गया*
“आज अर्थी निकाली गई है… और 10 दिन बाद दसगात्र का न्योता भी तैयार रखिए…”
यह बयान किसने दिया…?
किसके लिए कहा गया…?
और क्यों कहा गया…?
इसी चर्चा ने पूरे आंदोलन को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया।
किसने मंत्री पर साधा निशाना…?
*मंच से कहा गया की—*
“सत्ता का अंतिम दौर चल रहा है… आगामी चुनाव में जनता जवाब देगी… नवागढ़ विधानसभा में मंत्री जी नजर नहीं आएंगे…”
क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयान था…? या जनता के भीतर पनप रहे असंतोष की खुली चेतावनी…?
राम नाम और गौ माता सिर्फ चुनाव तक…?
*“चुनाव आया तो राम-राम…वोट मिला तो सब बेनाम…?”*
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि चुनाव के समय राम और गौ माता का नाम लेकर सत्ता हासिल की जाती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद ना गौ वंश की सुरक्षा दिखाई देती है और ना किसानों की चिंता।
क्या गौ रक्षा सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित है…?
क्या गौठान योजनाएं सिर्फ कागजों में चल रही हैं…?
और अगर सब ठीक है तो आखिर 300 गौ वंश की मौत कैसे हुई…?
झूठी एफआईआर… या आवाज दबाने की कोशिश…?
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जो भी गौ वंश और किसानों के पक्ष में आवाज उठाता है, उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई और झूठी एफआईआर दर्ज कर दबाने का प्रयास किया जाता है।
क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध बन चुका है…?
क्या जनहित की आवाज को पुलिस बल के सहारे दबाया जाएगा…?
पुलिस के सामने भाजपा-कांग्रेस भिड़े प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नारेबाजी और झड़प हुई।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।
मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।
जनता पूछ रही है…
“गौ वंश मरे तो जिम्मेदार कौन…?
फसल उजड़े तो जवाबदार कौन…?
वादे टूटे तो दोषी कौन…?
और जनता रोए तो सुनने वाला कौन…?”
नवागढ़ की यह लड़ाई अब सिर्फ राजनीति नहीं रही…
यह सवाल बन चुकी है—
गौ वंश की सुरक्षा का…
किसानों के भविष्य का…
और सत्ता की संवेदनशीलता का…!


