“सुशासन चौपाल में उठा शराब माफिया का मुद्दा—ग्रामीणों के तीखे सवालों से घिरा आबकारी विभाग”…

“जहां कानून हो कमजोर… और सच हो लाचार, वहीं पनपता है धंधा—अवैध शराब का कारोबार!
जब सवाल उठे गांव से… और जवाब ना आए,तो समझो सिस्टम कहीं न कहीं जरूर लड़खड़ाए!”
बेमेतरा – बेमेतरा जिले के मुहरेंगा पंचायत में आयोजित सुशासन चौपाल उस वक्त गर्मा गई, जब ग्रामीणों ने खुलेआम चल रहे अवैध शराब कारोबार को लेकर प्रशासन और आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
ग्रामीणों ने शिकायत करते हुए बताया कि
शराब दुकानों से खुलेआम “कोचियों” को शराब सप्लाई की जा रही है। छठ्ठी, शादी और अन्य आयोजनों के नाम पर 2–3 पौवा लेकर जाने वालों पर कार्रवाई कर दी जाती है,
लेकिन बड़े स्तर पर अवैध बिक्री करने वालों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
*ग्रामीणों का आरोप*
गांव वालों ने सीधा आरोप लगाया कि “जब भी अवैध शराब की सूचना दी जाती है, तो अधिकारी फोन तक नहीं उठाते।” “आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारी कमीशन के चक्कर में कार्रवाई करने से बचते हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि अगर सख्ती से कार्रवाई की जाए, तो अवैध शराब का कारोबार तुरंत बंद हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से यह धंधा फल-फूल रहा है।
*एक बड़ा सवाल*
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि— आखिर छोटे स्तर पर कार्रवाई और बड़े स्तर पर चुप्पी क्यों?
क्या सच में “कमीशन” के चलते कार्रवाई से बचा जा रहा है?
और क्यों कार्रवाई के नाम पर आबकारी निरीक्षकों के “पसीने छूटने” लगते हैं?
*मंत्री की प्रतिक्रिया*
खाद्य मंत्री के सामने जब यह मामला उठा, तो उन्होंने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश देने की बात कही।
“जब चौपाल में सच की आवाज़ गूंजती है,
तो कुर्सियों की नींव भी हिलती नजर आती है…
अब देखना ये है—क्या होगा कार्रवाई का वार,
या फिर यूं ही चलता रहेगा अवैध शराब का कारोबार?”


