बेमेतरा में गहराता पेयजल संकट: करोड़ों खर्च, फिर भी जनता प्यास से परेशान…

बेमेतरा – बेमेतरा जिले में इन दिनों पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर और नगर पंचायतों के लोगों को रोजमर्रा की जरूरत के लिए भी पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र और राज्य सरकार नगर विकास और पेयजल योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो फिर ये समस्या खत्म क्यों नहीं हो रही?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते व्यवस्था सुधारने के बजाय “आग लगने पर कुआँ खोदने” वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। गर्मी बढ़ते ही पानी की किल्लत सामने आती है और तब टैंकर व्यवस्था या अस्थायी समाधान शुरू कर दिए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आती।
नगर पालिका और नगर पंचायतों में पाइपलाइन लीकेज, खराब मोटर, अधूरी जल योजनाएं और अव्यवस्थित जल वितरण जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। कई वार्डों में दिनों-दिन पानी नहीं पहुंचता, जिससे लोगों को निजी साधनों या महंगे टैंकरों पर निर्भर होना पड़ता है।
जनता का सवाल है कि:
आखिर योजनाओं का पैसा कहां खर्च हो रहा है?
जिम्मेदार अधिकारी समय पर निरीक्षण क्यों नहीं करते?
हर साल गर्मी में वही संकट क्यों दोहराया जाता है?
स्थिति यह है कि मूलभूत सुविधा होने के बावजूद लोगों को खुद ही संघर्ष करना पड़ रहा है। यदि समय रहते ठोस योजना, पारदर्शिता और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी विकराल रूप ले सकता है।
अब जरूरत है सिर्फ कागजी योजनाओं की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने की—ताकि बेमेतरा की जनता को उनके हक का पानी मिल सके।


