सहकारी समितियों के दैनिक कर्मचारियों से काम पूरा और वेतन अधूरा जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे रहे सवाल…

*खास रिपोर्ट खास खबर* – बेमेतरा जिले की सहकारी समितियों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की स्थिति दिन-ब-दिन चिंताजनक होती जा रही है। कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण इन कर्मचारियों के सामने अब रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। परिवार चलाने की जिम्मेदारी, बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च—सब कुछ प्रभावित हो रहा है।
*वेतन नहीं, कैसे चले घर..?*
दैनिक कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि 4 से 8 महीने तक का वेतन लंबित है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। कई कर्मचारी कर्ज लेकर घर चला रहे हैं, तो कुछ ने जरूरी खर्चों में कटौती शुरू कर दी है।
*जिम्मेदार मौन, समाधान दूर*
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
*बढ़ता आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी*
स्थिति से परेशान कर्मचारियों में अब आक्रोश भी बढ़ने लगा है। उनका कहना है कि अगर जल्द वेतन भुगतान नहीं किया गया, तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वे धरना-प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
*प्रशासन से उम्मीद*
दैनिक कर्मचारियों की मांग है कि उनके लंबित वेतन का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए और भविष्य में समय पर वेतन सुनिश्चित किया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक कर्मचारियों को राहत मिलती है।


