नवागढ़ विधानसभा में ‘फेसबुक आईडी’ पर सियासी संग्राम — साजिश या सियासत? नवागढ मे मची राजनैतिक भूचाल…

बेमेतृआ / नवागढ – नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक संदिग्ध फेसबुक आईडी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। यह आईडी कथित तौर पर “नवागढ़ के आवाज” के नाम से संचालित हो रही है,जिनके फालोवर 2 हजार 2 सौ दिखा रहा है और लगभग 4सौ 34 लोग फोलो कर रहे है जिसमे अब तक का 4 सौ 63 पोस्ट स्पष्ट देखा जा सकता है। अब नवागढ के आवाज फेसबुक आईडी के जरिए भ्रामक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्ट साझा किए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर वरिष्ट भाजपा कार्यकर्त्ता देवासाद चतुर्वेदी ने गंभीर आरोप लगाते हुए नवागढ़ थाने में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। उनका कहना है कि यह कोई सामान्य सोशल मीडिया गतिविधि नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य किसी विशेष राजनीतिक दल — खासकर भाजपा — की छवि को धूमिल करना है।
*क्या है पूरा मामला…?*
“नवागढ़ के आवाज” नाम की फेसबुक आईडी से लगातार विवादित पोस्ट किए जा रहे हैं
पोस्ट में स्थानीय राजनीति और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है
आईडी संचालक की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं आखिर पर्दे के पीछे कौन कर रहा साजिश उनकी मंशा क्या है..? आखिर भाजपा का लोगो लगाकर ऐसा करने वाले अपने या पराये सवाल थमने का नाम नही ले रहा है।
*उठ रहे गम्भीर और बड़े सवाल*
नवागढ के आवाज के नाम पर आखिर फेसबुक आईडी को कौन चला रहा है? इन तमाम बातो को देखते हुई कुछ इस तरफ की सवाल खुलकर आम लोगो के बीच आ रहे है आईए जानते है आखिर वह कौन कौन सी सवाल है..
(पहला – सवाल )
क्या यह किसी राजनीतिक विरोधी की सोची-समझी रणनीति है?
(सवाल – दूसरा)
क्या भाजपा को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है?
(सवाल – तिसरा)
या फिर यह अंदरूनी गुटबाजी का परिणाम है?
*क्या होगी पुलिस की भूमिका*
अब नजरें नवागढ़ पुलिस पर टिकी हैं। यदि एफआईआर दर्ज होती है, तो साइबर सेल की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि आईडी कहां से ऑपरेट हो रही है और इसके पीछे कौन लोग हैं।
*साजिश के पीछे कौन?**
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह काम किसी व्यक्ति विशेष, राजनीतिक दल, या संगठित समूह का है। लेकिन इतना तय है कि मामला अब तूल पकड़ चुका है और आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। बहरहाल मामला जल्द ही नवागढ थाना पहुचने की बात सामने आ रही है।
*एक नजर निष्कर्ष पर*
सोशल मीडिया के इस दौर में फर्जी आईडी और भ्रामक प्रचार लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। नवागढ़ का यह मामला भी कहीं न कहीं उसी कड़ी का हिस्सा लगता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद असली चेहरा सामने आता है या नहीं। यह थाने मे एफाईआर दर्ज होने के बाद नवागढ पुलिस के लिए चुनौती से कम नही होगा..!
*देवासाद चतुर्वेदी का बयान*
देवासाद चतुर्वेदी ने स्पष्ट कहा है कि
“इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी इसके पीछे है, उसे बेनकाब किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर जनता को गुमराह करना गंभीर अपराध है।”


