हितग्राहीयों के राशन पर किसकी लगी नजर…? जिम्मेदार अफसरों को सूचना देने के बावजूद ना राशन, ना आश्वासन और कार्यवाही भी नहीं आखिर क्यों…?

*हकिकत उजागर होते ही हाथ पांव किसका फुलने लगा…? आखिर जवाबदार की क्या जिम्मेदारी बनती है..?और सूचना देने के बाद भी राशन उपलब्ध नहीं करवा पाना व राशन दुकान संचालक पर आखिर मेहरबानी का क्या राज है..?*
*खाद्य मंत्री के निज विधानसभा का वह कौन सा राशन दुकान संचालक है जो जानबूझकर हितग्राहियों के हस्ताक्षर करवाकर व आनलाइन राशन का थम लगवाने के बाद भी राशन नहीं दे रहे हैं। आखिर जिम्मेदार अफसरों को क्या खाद्य मंत्री व डारेक्टर के समक्ष हितग्राही लिखित शिकायत करेंगे तभी राशन दिलवाएंगे।*
बेमेतरा – आश्वासन और राशन के लाले पड़े खाद्य मंत्री के नीज विधान सभा नवागढ़ में आखिर किनके निर्देश पर शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकान पर ताला लटका लगाकर हितग्राहियों को राशन नहीं देना चाहते हैं…?पिछले महीने व 10 से 12 दिन बीत जाने के बाद भी कई हितग्राहीयों राशन से वंचित क्यों होना पड़ रहा है। आखिर खाद्य निरीक्षकों को किस बात का वेतन दिया जाता है जिनकी जिम्मेदारी है अपने क्षेत्र अंतर्गत संचालित होने वाले राशन दुकानों पर औचक निरीक्षण व हितग्राहियों को किसी बात की कोई समस्या है की नहीं है इस बात का पता लगाने के बजाय अपने में मस्त है जिम्मेदार की गैर जिम्मेदाराना कर्तव्य पर्दा हटाते ही खाद्य विभाग की लापरवाही या उजागर होने लगा । मगर बडी दुर्भाग्य का विषय है की जिनकी जिम्मेदारी है व हाथ में हाथ धरे बैठे हैं और सरकारी कुर्सी से उठने की फुर्सत नहीं निकाल पा रहे है। कहीं दौरा के नाम पर सरकारी एसी व पंखे की लत से बाहर निकले का समय ही नहीं मिलता होगा इस लिए कही दौरा का खाना पूर्ति तो नहीं किया जा रहा सवाल तो बनता है क्योंकि सवाल आम हितग्राहियों के राशन पर डाका तो नहीं …? आखिर दौरा कहा करते हैं और दौरा करते हैं तो इतनी बड़ी लापरवाही क्यों सामने नहीं देख पाते जिम्मेदार और शिकायत मिलने पर कार्यवाही की बात करते हैं शर्म आनी चाहिए जिनके टेक्स के बदौलत वेतन मिलता है उनके साथ इतना बड़ा नाइंसाफी आखिर कब तक करते रहोगे थोड़ी तो ईमानदारी से काम कर लो …? कार्य महज दिखावे के रूप में तो नहीं कर रहे जिम्मेदार एक संदेह का विषय है। हितग्राही राशन मिल जाए इस उम्मीद से बैठे हुए है। हितग्राहियों को राशन मिलने की उम्मीद रखें या फिर सपना दिखाकर डकार तो नहीं लेंगे। बेमेतरा जिले के कई उचित मूल्य की दुकानों में ताला लटक रहा है। जिनसे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
*हितग्राहीयों के राशन पर कहीं बिचौलियों ने सेंध तो नहीं लगा दी..सवाल चर्चा में है*
आखिर क्यों एक दो दिन ही राशन देते हैं जिनको मिल गया तो ठीक जिनको नहीं मिला तो भी ठीक भय और भ्रष्टाचार का आंतक कब तक चलेगा..? जिम्मेदार अधिकारी आम जनता के राशन में डाका डालने वाले को संरक्षण और पनाह ना दे क्योंकि उनके संरक्षण के वजह आज सैकड़ों हितग्राहियों को राशन नहीं मिल पाया और ना ही खाद्य निरीक्षक दिलवा भी नहीं पाया ऐसे में जनता के बीच सरकार की छवि आखिर खराब कौन कर रहा है…? होली जैसे त्यौहार से पहले राशन मिलेगा कह थम लगवा लिया और देने की बारी आई तो राशन संचालक द्वारा राशन आएगा तो मिलेगा अभी जावो कह बाहर का रास्ता दिखा दिया और ना राशन और ना आश्वासन! राशन नहीं देना कितनी बड़ी लापरवाही है। लेकिन होली पर्व में हितग्राहियों को राशन नहीं मिल पाने से काफी नाराजगी देखने को मिला । ग्राम पंचायत मखनपुर,कटई,बहरबोड सहित नवागढ़ विधानसभा में कई उचित मुल्य की राशन दुकान में हितग्राहियों को उनके हिस्से का राशन नहीं मिल पाया और जवाबदार लोग चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।
*ना राशन ना आश्वासन और राशन नहीं मिलने का क्या है कारण…?*
पिछले महिने के 10 से 12 दिन बीत जाने के बाद भी ना राशन ना आश्वासन और कुर्सी छोड़ रहे प्रशासन में बैठे लोगों की निष्क्रियता स्पष्ट हो चूका है ऐसे लापरवाह अधिकारी/कर्मचारियों को जिले से बाहर का रास्ता आखिर क्यों नहीं दिखा रहे..?


