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August 4, 2026 7:51 pm

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द राम भक्त

सनातन मर्यादा का प्रतीक

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आज पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत 15 सशस्त्र माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है।

आज पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत 15 सशस्त्र माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है।

@therambhaktTRBnews:-  शासन द्वारा प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओडिशा स्टेट कमेटी के पश्चिमी सब जोन अंतर्गत बरगढ़–बलांगीर–महासमुंद डिविजनल कमेटी के सभी 15 माओवादियों ने जिला पुलिस महासमुंद के समक्ष अपने धारित हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया।

 

इन आत्मसमर्पित नक्सलियों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं।

 

इन 15 नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

जिसमें 1 स्टेट कमेटी मेंबर पर 25 लाख,

2 डिविजनल कमेटी मेंबर पर 8 लाख,

5 एरिया कमेटी मेंबर पर 5 लाख,

और 7 पार्टी मेंबर पर 1 लाख रुपये का इनाम शामिल था।

 

आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 अत्याधुनिक और ऑटोमेटिक हथियार जमा किए गए।

इनमें 3 एके-47, 2 एसएलआर, 2 इंसास, 4 थ्री-नॉट-थ्री राइफल और 3 बारह बोर बंदूकें शामिल हैं।

 

समर्पण करने वालों में विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना, उम्र 57 वर्ष, जो स्टेट कमेटी मेंबर और बीबीएम डिवीजन का प्रभारी था, भी शामिल है। उसने एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया।

 

इन 15 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब जोन पूरी तरह समाप्त हो गया है। एक वर्ष पहले तक यहां 2 डिवीजन और 7 एरिया कमेटियां सक्रिय थीं।

 

अब छत्तीसगढ़ का रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा का संबलपुर रेंज पूर्ण रूप से नक्सलमुक्त हो गए हैं।

 

मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय बीबीएम डिविजनल कमेटी के सदस्यों को आत्मसमर्पण के लिए आकाशवाणी, बैनर, पोस्टर, पाम्पलेट और अन्य संवाद माध्यमों से लगातार अपील की जा रही थी।

 

शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत पद अनुसार इनाम राशि, हथियार के साथ समर्पण पर सुविधा, स्वास्थ्य सुविधा, आवास और रोजगार व्यवस्था का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था।

 

माओवादी विचारधारा से मोहभंग, जंगलों में कठिन जीवन, परिवार से दूरी और पहले समर्पण कर चुके साथियों को खुशहाल जीवन जीते देखकर इन 15 कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

 

रक्षित केंद्र परिसर परसदा में उन्हें तिरंगा, संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन के प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।

 

सरकार ने बस्तर के शेष नक्सलियों और ओडिशा के पूर्वी सब जोन के माओवादियों से भी अपील की है कि वे हथियार त्यागकर संविधान और तिरंगा थामें तथा विश्वास, सुरक्षा और विकास का रास्ता चुनें।

 

राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद व विकास पर केंद्रित प्रयासों के तहत पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन कार्यक्रम की यह बड़ी सफलता मानी जा रही है।

 

बाइट- एडीजी नक्सल आपरेशन

(विवेकानंद सिन्हा)

Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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