अवैध कारोबारियों को खुली छूट… महिलाएं शराब बंदी का लगा रहे नारे… कार्यवाही के नाम पर सिर्फ अवैध वशुली…
*अवैध कारोबारियों को संरक्षण प्रदान करने कब तक चलेगा हफ्ते/महिने का वशुली का खेल*
*सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर जनता के साथ धोखा तो नहीं…आखिर कब सुधरेंगे जिम्मेदार…*
बेमेतरा – बेमेतरा शहर एक धार्मिक आस्था और शांति का स्थल माना जाता आ रहा है किंतु कुछ लोगों ने बेमेतरा जिले को बदनाम करने का ठेका ले रखा है मानों पैसे कमाने हर हत्थकंडे अपनाकर अपना आय का जरिया बना रखे हैं जिनके वजह से आज बेमेतरा अपना वर्चस्व खोता नजर आ रहा है क्योंकि अवैध गतिविधियों के कारोबारीयों को बडे स्तर के राजनीतिक संरक्षण व प्रशासनिक अफसरों की मशवरा मिल रहा है नतिजन दिन प्रतिदिन हालात बदलते नजर आ रहा है। आज होटलों और लाजों में हर दिन लड़के लड़कियों को कमरा मुहैया कराया जा रहा है। बेमेतरा जिले में लांज अब ओयो से कम नहीं बेमेतरा जिले की लांज के आड़ में देह व्यापार का कारोबार तेजी से चल रहा है।
*विभागीय जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी का राज क्या…?*
बेमेतरा जिले के हर चौक चौराहे पर खड़े होकर नजारा देखा जा सकता है हर राहगीरों को इनकी जानकारी है पान ठेले में चाय के टपरी पर बस चर्चा आम हो गया है । सब गतिविधियों को जानते हुए भी जिम्मेदार लोगों जो बड़े बड़े सामाजिक संगठन के नाम पर सिर्फ फोटो छाप समाज सेवा को ही अपनी कर्तव्य समझते हैं किंतु असल में बेमेतरा की पावन धर्रा को बचाने के बजाय दाग लगाने में सभी लगे हुए हैं मिडिया के नजर में आने के बावजूद भी दिखाई नहीं देना अखबारों में सिर्फ चापलूसी की खबरों की भरमार लगी रहती है किंतु आवाज उठाने में धुरंधरों की पेंट गीली हो जातीं हैं। उन्हीं लोगों को सम्मान और बडे ऊंची स्तर का पदवी प्राप्त कर चूकें है। हकीकत को अपनी लेखनी में लिखने की हिम्मत ही नहीं वे सिर्फ कुछ नेताओं के गुलाम हो चुके हैं। असल बात है बर्दास्त तो नहीं कर पाएंगे क्योंकि सत्य बात कड़वी होती है। बुद्धिजीवीयों की बुद्धि में लगी जंग एकता के नाम पर वर्चस्व की लड़ाई एक दूसरे की पोल खोलते हुए मिल जाते हैं। सीनियर जुनियर के चक्कर में पीसता देश की पत्रकारिता आज चौथे स्तंभ सिर्फ चापलूसी करने वाले के लिए ही बन गई है । कुछ तो ऐसे हैं जिनकी शरीर और बुद्धि सटीया गई है। और चापलूसी में नम्बर वन बन गए हैं।
*गांव के हर गलियों में बिकता शराब*
आज बेमेतरा जिले के कई गावों में अवैध शराब का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है शराब माफियाओं ने पूरे शहर और ग्रामीण इलाकों में अपना जाल बिछा रखा है गांव-गांव के गली-गली में अवैध रूप से अवैध तरीके से शराब बेची जा रही है
*कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिससे शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं*
*आबकारी विभाग और पुलिस की चुप्पी*
आबकारी विभाग और बेमेतरा जिले के पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं आरोप है कि ये दोनों विभाग शराब माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और केवल शराब पीने वाले कुछ गरीब तबके के लोगों व छोटे-मोटे विक्रेताओं को पकड़कर खानापूर्ति कर वाहवाही लूटने में लगे हुए हैं। वहीं खुले आम होटलों और ढाबों में हर ब्रांड की शराब उपलब्ध कराई जा रही है उसका क्या…? आम नागरिकों ने इस बात को लेकर संदेह जताया जा रहे है कि कहीं पुलिस और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत तो नहीं है
जिसमे एसडीएम ने अवैध शराब के खिलाफ कोई भी अभी कार्यवाही क्यों नहीं कर पाया । इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या थाना चौकी प्रभारीयों पर शराब माफियाओं के दबाव में तो नहीं है और अवैध शराब के कारोबार पर रोक नहीं लगा पा रहे तो जनता अब किस पर उम्मीद लगाए प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से कब लेगा और इस अवैध धंधे को खत्म करने के लिए सख्त कदम कब उठाएगा साथ अवैध शराब के कारोबार की गंभीर स्थिति को दर्शाती है और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े करती है।
*होटल बना अय्याशी का अड्डा…ढाबों में बिक रही हर ब्रांड की शराब*
होटल बना अय्याशी का अड्डा और ढाबों पर बिक रही हर ब्रांड की शराब क्या …? ऐ अपराध नहीं इस तरीके से न जाने कितने गतिविधियों पर अवैध कारोबार फल फूल रहा है किंतु प्रशासन की बेतुकी जुबान और दिखावे के कार्यवाही से सिर्फ आम जनता को गुमराह किया जा रहा है और कमीशन का खेल चल रहा है जिनके चलते अवैध कारोबार करने वाले दिन प्रतिदिन उन्नति और तरक्की कर रहे हैं नतीजन आम जनता आज सुरक्षित नहीं वहीं अवैध कारोबारी करने वाले दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति तरक्की कर रहे हैं इसका पूरा संरक्षण प्रशासनिक अमला दे रहे हैं तभी सम्भव हो रहा है। वहीं पुलिस अधीक्षक बेमेतरा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की बात करते हैं भला ऐसे में कैसे सम्भव होगा। नतीजा होटल में अवैध कारोबार जोरों शोरों से फल फूल रहा है और प्रशासन चुप्पी साधे बैठी हुई है आखिर कब तक..? और क्यों…? क्या सप्ताह और महीने की वसूली तो नहीं यह हम नहीं बल्कि सवालों के जवाब में यह प्रश्न उठ रहा है। आप देखने वाली बात ही होगी की खबर का कितना असर प्रशासन को पड़ रहा है और किस तरीके से होटल पर होने वाले अवैध कारोबार पर अंकुश लगा पाते हैं या फिर कमीशन का खेल चलता रहेगा यह हम नहीं बल्कि क्षेत्र की जनता की जुबान में चल रहा है।


