आदर्श आचार संहिता था लागू …चुनाव के पहले बना भावी प्रत्याशी सरपंच…निकाल ली लाखों रुपए… जांच का विषय…
सरपंच बनने से पहले कैसे मिला वित्तीय पावर… लिखित शिकायत मिलते ही त्वरित निराकरण कर कार्यवाही करने का दिया आश्वासन…
द राम भक्त – अजब गजब दुनिया की रीत ऐ सब छत्तीसगढ़ सरकार की छवि धुमिल करने व स्थानीय विधायक व कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल जी की राजनीति कैरियर को दाग लगाने की कोशिश जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चंदनू का है जहां भारतीय निर्वाचन आयोग की आदर्श चुनाव आचार संहिता राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के लिये बनायी गयी एक नियमावली है जिसका पालन चुनाव के समय आवश्यक है। चुनाव आयोग चुनाव से पहले इसके लागू होने की घोषणा करता है और चुनाव के बाद इसके समाप्त होने की। यह सरकार, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों तथा जनता को दिये गये निर्देश हैं, जिसका पालन चुनाव के दौरान किया जाना जरूरी है। चुनाव आचार संहिता चुनाव की तिथि की घोषणा से लागू होता है और यह मतदान के परिणाम आने पर समाप्त हो जाता है।
*हम अपने प्रिय पाठक को विस्तार से बताने का प्रयास ….*
लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला के अंतर्गत आनेवाले जनपद पंचायत बेमेतरा के ग्राम पंचायत चंदनू का एक मामला सामने आया है जिसे हम अपने प्रिय पाठक को विस्तार से बताने का प्रयास करते है। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा 20 जनवरी 2025 को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा की उसी दौरान पंचायत चंदनू के जीतनदास सरपंच था | सरपंच जीतवदास के द्वारा दिनाक जनवरी 2025 को 99895/- रूपया राशि आवरण किया और उसी माह भावीप्रत्याशी राहुल शर्मा के द्वारा दिनाक 26 जनवरी 2025 को 94000/- रुपया राशि आहरण किया है DSC के माध्यम से| यह कितना अचंभव व विचारणीय बात है की आदर्श आचार साहिता लागु होने के बाद चुनाव दिनाक से पहले भावीप्रत्याशी सरपच कैसे बना ? और किस अधिकार से शासकीय राशि आहरण किया? यह पुरा सन्देह तथा उच्च स्तरीय जांच का विषय है इस मामले पर जो भी दोषी है उन सब पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
*आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन*
पंचायत चुनाव का पोल खोल दी यह पूरा मामला … क्या इस प्रकार का कृतय होना शासन प्रशासन के लिए शोभनीय है? या शासन प्रशासन जानबुझ कर किया है ? शासन प्रशासन कि प्रशासनिक कसौटी में कमी स्पष्ट देखा जा सकता है। जिसके वजह से आदर्श आचार सांहिता का धजिया उडाया गया है। क्या इस मामले का सम्पूर्ण जानकारी मिडिया के पहले शासन प्रशासन को पहले से मालुम था ? या मिडिया से पता चलने के बाद विभागीय अधिकारी कर्मचारियों ने जानने का कोशिश की यदि नहीं तो इतनी लापरवाही कैसे हों रही है । जनपद पंचायत सीईओ क्या कहता है जब मिडिया वाले सीईओ से बातचीत हुवा तो दो-चार दिन मे जांच उपरांत कार्यवाही की बात बोले है और निष्पक्ष खबर चलाने के लिए सीईओ से वर्जन की बात कहने पर सीईओ इस मामले को लेकर अपना वर्जन देने से साफ इंकार कर दिया आगे के खबर जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहे |


