मोहतरा (ख) मानवता हुआ शर्मसार, गांव में जातीय अत्याचार का गंभीर मामला आया सामने, परिवार का उजड़ा आशियाना
द राम भक्त हनुमान(बिनोद नवरंगे)बेमेतरा:- जिले के नवागढ़ विधानसभा अंतर्गत ग्राम मोहतरा(ख) में जातीय भेदभाव, प्रशासनिक कठोरता और मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। गांव के अनुसूचित जाति (सतनामी समाज) के श्यामदास हिरवानी, जो कि भूमिहीन हैं, बीते 18 वर्षों से अपने 17 सदस्यीय परिवार के साथ गांव की सरकारी घासभूमि पर झोपड़ी बनाकर जीवन यापन कर रहे थे।
*दबंगों ने किया उत्पीड़न, सरपंच की भूमिका संदिग्ध*
पीड़ित श्यामदास का आरोप है कि गांव के कुछ जातिवादी मानसिकता के लोगों ने सरपंच के साथ मिलकर वर्षों से उन्हे सामाजिक रूप से अपमानित किया और कई बार जान से मारने की धमकियां दीं। हाल ही में, भीषण गर्मी के दौरान उनकी झोपड़ी की बिजली काट दी गई और मीटर तक उठा लिया गया।
श्यामदास का कहना है कि उनकी बहु-बेटियों को भी अपशब्द कहे गए और परिवार को गांव से बेदखल करने की धमकी लगातार दी जाती रही।
*18 जून को पुलिस बल और प्रशासन के साथ गिरा दिया गया आशियाना*
पीड़ित परिवार के अनुसार, 18 जून 2025 को तहसीलदार, पटवारी और पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अमला पहुंचा और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उनका झोपड़ीनुमा घर तोड़ दिया गया। जबकि अब मानसून का समय शुरू हो चुका है और परिवार की महिलाएं व छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
*2019 में भी हुआ था अमानवीय व्यवहार*
श्यामदास हिरवानी का कहना है कि 4 साल पहले कांग्रेस सरकार के समय भी गांव के दबंगों ने उनके साथ बर्बरता की थी। उन्हें बुरी तरह पीटा गया था, कपड़े उतारकर अर्धनग्न हालत में पूरे गांव में घुमाया गया और फिर गांव के सभी लोगों के पैर छूकर माफी मांगने पर मजबूर किया गया था। इसके बावजूद पुलिस ने दबंगों पर कार्रवाई करने की बजाय पीड़ित के खिलाफ ही केस दर्ज करने की कोशिश की।
*विधायक खुद अनुसूचित जाति के फिर भी उनके चुप्पी पर उठे सवाल*
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नवागढ़ सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है और क्षेत्र के वर्तमान विधायक स्वयं सतनामी समाज से आते हैं। बावजूद इसके, पीड़ित के अनुसार, प्रशासन की इस कार्रवाई में विधायक की चुप्पी सवाल खड़े करती है।
*भीम आर्मी और सामाजिक संगठनों ने जताया विरोध*
घटना की निंदा करते हुए भीम आर्मी बेमेतरा संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि10 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को पुनर्वास व न्याय नहीं मिला, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। संगठन ने कहा कि यदि पीड़ित परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी सरपंच, प्रशासन और सरकार की होगी।


