देवरबीजा से उठा बयान, सोशल मीडिया में मचा सियासी बवाल! गुरु दयाल सिंह बंजारे के बोल पर भाजपा का थाने में वार, जनता के कमेंट्स ने खोली राजनीतिक बहस की नई परत!
*किसी ने बताया सच, किसी ने पूछा इतिहास; किसी ने भाषा पर उठाई उंगली तो किसी ने व्यक्तिगत टिप्पणियों से किया पलटवार। अब सवाल एक बयान का नहीं, सियासत में गिरते संवाद के स्तर का है!*

बेमेतरा – सियासत में शब्दों की भी अपनी ताकत होती है। कभी यही शब्द जनता का विश्वास जीतते हैं तो कभी राजनीतिक तूफान खड़ा कर देते हैं। बेमेतरा जिले के देवरबीजा में कांग्रेस के ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव गुरु दयाल सिंह बंजारे के एक कथित विवादित बयान ने ऐसा ही सियासी बवाल खड़ा कर दिया है, जिसकी गूंज अब थाने से लेकर सोशल मीडिया के कमेंट बॉक्स तक सुनाई दे रही है।
भाजपा और आरएसएस को लेकर अंग्रेजों के संदर्भ में की गई टिप्पणी पर भाजपा जिलाध्यक्ष एवं कार्यकर्ताओं ने सिटी कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा अध्याय सोशल मीडिया पर शुरू हुआ। यहां न कोई विधानसभा थी, न कोई माइक और न ही कोई राजनीतिक मंच। था तो सिर्फ कमेंट बॉक्स, जहां लोगों ने अपने-अपने अंदाज में नेताओं को आईना दिखाने की कोशिश की। किसी ने बयान का समर्थन किया तो किसी ने बोलने के तरीके पर सवाल दागे। देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक बहस से व्यक्तिगत कटाक्षों तक पहुंच गया।
कमेंट बॉक्स में छिड़ी जुबानी जंग, किसी ने इतिहास पूछा तो किसी ने हिसाब!
बुधराम साहू नामक यूजर ने हलाल के वंशजों को लेकर सवाल उठाया तो कान्हा चौबे ने सीधे टिप्पणी का समर्थन करते हुए लिखा कि इसमें गलत क्या है, जो सच है वही कहा गया है। एक अन्य कांग्रेस समर्थक यूजर ने भी सच बोलने से नहीं डरने की बात कही।
वहीं दिलीप साहू ने अलग ही मोर्चा खोलते हुए गुरु दयाल बंजारे की भाषा पर सवाल उठाया। उन्होंने नवागढ़ ब्लॉक में राम मंदिर निर्माण के लिए सरपंचों से कथित तौर पर 11 हजार रुपये चंदा लेने और भवन निर्माण का मुद्दा उठाया। यह टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का हिस्सा बनी, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अनिल रजक ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर कटाक्ष किया तो राजेश साहू ने भी व्यक्तिगत टिप्पणी कर दी। शुभम शुक्ला ने एंटोनियो माइनो का नाम लेकर गांधी परिवार पर निशाना साधा। लव साहू ने तो गुरु दयाल सिंह बंजारे से ही उनके पारिवारिक इतिहास को लेकर सवाल कर दिया। वहीं रुद्र ने ‘जय भीम, जय सतनाम’ लिखकर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रकाश कुमार सैनी ने उन्हें पागल करार दिया तो राज साहू ने तंज कसते हुए लिखा, ‘बुरा लग गे का ग भैया।’ डे. साहब वर्मा सहित अन्य यूजर्स ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।
*नेताओं की जुबान पर जनता का सवाल, आखिर राजनीति किस दिशा में जा रही है?*
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जनता जिन प्रतिनिधियों को अपनी आवाज बनाकर विधानसभा तक भेजती है, क्या उनसे उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वे जनता की समस्याओं, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और विकास पर अपनी ऊर्जा खर्च करें?
एक तरफ बयानबाजी, दूसरी तरफ शिकायत और तीसरी तरफ सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत कटाक्ष। इस राजनीतिक त्रिकोण में जनता के मूल मुद्दे कहीं पीछे छूटते नजर आ रहे हैं।
इतिहास पर बहस होनी चाहिए, विचारधारा पर सवाल उठने चाहिए और जनप्रतिनिधियों से जवाब भी मांगा जाना चाहिए। लेकिन क्या राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत छींटाकशी में बदल देना ही अब सियासत का नया तरीका बनता जा रहा है?
देवरबीजा का विवाद फिलहाल थाने में दर्ज अपराध और सोशल मीडिया की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि गुरु दयाल सिंह बंजारे इस विवाद पर क्या सफाई देते हैं और भाजपा-कांग्रेस के बीच यह जुबानी जंग आगे कौन-सा मोड़ लेती है।
क्योंकि लोकतंत्र में जनता सिर्फ वोट देने के लिए नहीं, सवाल पूछने के लिए भी होती है। और जब जनता का कमेंट बॉक्स ही नेताओं के लिए सवालों का मंच बन जाए, तो समझिए सियासत में मामला सिर्फ बयान का नहीं, साख का भी हो चुका है!


