बिना होलोग्राम की शराब का खेल! बेमेतरा में अवैध सप्लाई नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार, 10.69 लाख का माल जब्त
*535 पौवा अंग्रेजी शराब, ईको कार, स्कॉर्पियो और एक्टिवा सहित 5 आरोपी गिरफ्तार; शराब की बोतलों पर फर्जी रेपर और शासन का होलोग्राम गायब मिलने से उठे बड़े सवाल—आखिर इस नकली खेल का असली सरगना कौन?*

बेमेतरा – शराब का कारोबार, शासन के राजस्व को चूना और आम जनता की सेहत से संभावित खिलवाड़! आखिर सीलबंद बोतलों में बिक रही शराब असली है या सरकारी ब्रांड का चोला पहनाकर कोई अवैध खेल चल रहा था? बेमेतरा पुलिस की ताजा कार्रवाई ने ऐसे कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले में अवैध शराब की सप्लाई के कथित नेटवर्क पर बेमेतरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना चंदनू और नांदघाट के दो अलग-अलग मामलों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुल 535 पौवा अंग्रेजी शराब, शराब सप्लाई में इस्तेमाल ईको कार, स्कॉर्पियो, सोल्ड एक्टिवा और तीन मोबाइल सहित करीब 10 लाख 69 हजार 200 रुपये की संपत्ति जब्त की है।
लेकिन इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू शराब की बोतलों पर शासन का होलोग्राम नहीं मिलना और शीशियों पर चिपके रेपर का कूटरचित पाया जाना है। पुलिस के मुताबिक, जब्त शराब की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। ऐसे में सवाल केवल अवैध शराब बिक्री का नहीं, बल्कि शराब की वास्तविकता, उसकी सप्लाई और संभावित नेटवर्क का भी है।
आखिर बिना सरकारी होलोग्राम वाली शराब बाजार तक कैसे पहुंची?
इसे तैयार करने या सप्लाई करने के पीछे कौन लोग हैं?
क्या यह किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है?
बिलासपुर से बेमेतरा तक फैली इस सप्लाई की कड़ियां कहां-कहां जुड़ी हैं?
और क्या इस कारोबार से जुड़े अन्य चेहरे भी जांच के दायरे में आएंगे?
पुलिस की जांच में आरोपियों से पूछताछ के दौरान बिलासपुर निवासी मनोज यादव की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, मनोज से पूछताछ में राजा भाठिया से संपर्क कर शराब प्राप्त करने की बात सामने आई है। इस संबंध में आगे की कार्रवाई जारी है। अब जांच का दायरा और आगे बढ़ने की संभावना है।
इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक श्री त्रिलोक बंसल के निर्देशन में साइबर सेल, थाना नांदघाट और थाना चंदनू की संयुक्त टीम ने जिस तत्परता से कार्रवाई की, वह सराहनीय है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हरीश यादव तथा संबंधित एसडीओपी के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने अलग-अलग कड़ियों को जोड़ते हुए पांच आरोपियों तक पहुंच बनाई।
लेकिन यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। असली चुनौती उस पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने की है, जहां से बिना होलोग्राम और कथित कूटरचित रेपर वाली शराब बेमेतरा तक पहुंच रही थी।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या पुलिस इस कारोबार के अंतिम खरीदार और स्थानीय सप्लायर से आगे बढ़कर इसके मुख्य स्रोत और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर पाएगी?
बेमेतरा पुलिस की कार्रवाई ने अवैध कारोबारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से बचना आसान नहीं। अब जनता की नजर इस जांच के अगले खुलासे पर है।
फिलहाल यह कार्रवाई ट्रेलर है या किसी बड़े शराब नेटवर्क की पूरी कहानी का पहला अध्याय? इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच से सामने आएगा।
देखते रहिए… न्यूज़ स्टोरी दृष्टि की खास पड़ताल।


