शिक्षा और सामाजिक संस्कारों को पाठ्यक्रम से जोड़ने पर जोर, प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ में डॉ. गोकुल बंजारे ‘चंदन’ को मिली अहम जिम्मेदारी
*प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज की दो दिवसीय आवासीय शिक्षा संगोष्ठी एवं कार्यशाला में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक दायित्व पर हुआ मंथन; डॉ. डी. एल. डहरिया बने अध्यक्ष, बेमेतरा के रामकुमार भारती को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी*

बेमेतरा – प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के तत्वावधान में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक दायित्वों को केंद्र में रखकर दो दिवसीय आवासीय शिक्षा संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन सतनाम धर्मशाला, मड़वा, गिरौदपुरी धाम, जिला बलौदाबाजार में किया गया। इस आयोजन में शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों, सामाजिक संस्कारों के संरक्षण, महापुरुषों के विचारों को पाठ्यक्रम में स्थान देने तथा युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में बेमेतरा जिले के प्रतिनिधियों सहित समाज के पदाधिकारी, साहित्यकार, पत्रकार और शिक्षाविद् शामिल हुए।संगोष्ठी में बेमेतरा के लिए विशेष उपलब्धि के रूप में कवि एवं साहित्यकार डॉ. गोकुल बंजारे ‘चंदन’ को प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ की कार्यकारिणी का सक्रिय सदस्य बनाया गया। वहीं, बेमेतरा के इंडियन पब्लिक स्कूल के संचालक रामकुमार भारती को प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इन जिम्मेदारियों को शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक भागीदारी बढ़ाने और समाज की शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
*शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक मूल्यों और संस्कारों को शामिल करने पर जोर*
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जांजगीर-चांपा की सांसद कमलेश जांगड़े थीं, जबकि अध्यक्षता प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के प्रदेशाध्यक्ष एल. एल. कोशले ने की। मुंगेली के राजेंद्र दिवाकर ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।प्रशिक्षण के दौरान वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और समाज के दायित्वों पर विचार-विमर्श करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान और परीक्षा में सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का विकास भी होना चाहिए।संगोष्ठी में सामाजिक संस्कारों, रीति-नीति, परंपराओं और समाज सुधार में योगदान देने वाले महापुरुषों के विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, ताकि विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
*दूसरे दिन हुआ प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ का गठन*
संगोष्ठी के दूसरे दिन शिक्षा से जुड़े विषयों पर कार्ययोजना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ का गठन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त बीईओ बिलासपुर डी. एल. डहरिया को अध्यक्ष बनाया गया। बेमेतरा के इंडियन पब्लिक स्कूल संचालक रामकुमार भारती को उपाध्यक्ष तथा कवि डॉ. गोकुल बंजारे ‘चंदन’ को कार्यकारिणी सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई।प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ के गठन को समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा के अवसरों से जोड़ने तथा सामाजिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
*शिक्षा के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की पहल*
कार्यशाला में इस बात पर भी बल दिया गया कि समाज के शैक्षणिक विकास के लिए शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उसे समाज के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों के आदर्शों से परिचित कराना भी जरूरी है।
वक्ताओं के विचार-विमर्श में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाने तथा युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा के जरिए रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करने की आवश्यकता प्रमुखता से सामने आई। संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए समाज के समग्र विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना रहा।
*साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाज के पदाधिकारियों की रही उपस्थिति*
इस अवसर पर सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर सेवक राम बांधे ‘बसेरा’, श्रीमती सुशीला सोनवानी, श्रीमती शकुंतला डांडे, डॉ. स्वामीराम बंजारे ‘सरल’, डॉ. मंगत रविंद्र, रामकुमार भारती, डॉ. एस. एल. निराला, दाऊ भुवन दास जांगड़े, राकेश नारायण बंजारे, महासचिव मोहन बंजारे, सहसचिव दिनेश बंजारे, युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रदीप श्रृंगी, सहदेव जोशी, प्रेमदास दोहरे, लखन लाल टोन्ड्रे, चोवाराम मधुकर, विजय डोरे और हिराऊ कुमार जांगड़े सहित अनेक साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षाविद् एवं सामाजिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
दो दिवसीय आवासीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला में शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक संस्कारों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर हुए मंथन के साथ प्रांतीय शिक्षा प्रकोष्ठ का गठन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रकोष्ठ में बेमेतरा के प्रतिनिधियों को मिली जिम्मेदारी से जिले की शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों को प्रांतीय स्तर पर आगे बढ़ाने के अवसर मिलने की उम्मीद जताई गई।


