सूखाताल पंचायत में वित्तीय अनियमितता के आरोप, ग्रामसभा और राशि आहरण को लेकर उठे सवाल

बेमेतरा/सूखाताल:- ग्राम पंचायत सूखाताल में सरपंच के खिलाफ उप सरपंच एवं पंचों ने वित्तीय अनियमितता और पंचायत संचालन में मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उप सरपंच अमित कुमार कुर्रे सहित अन्य पंचों का आरोप है कि पंचायत की 15वें वित्त आयोग सहित अन्य मदों की राशि का आहरण बिना पंचों एवं उप सरपंच को विश्वास में लिए और बिना पंचायत प्रस्ताव के किया जा रहा है। पंचों का कहना है कि पंचायत में होने वाले आय-व्यय की जानकारी भी उन्हें नियमित रूप से नहीं दी जा रही है।
उप सरपंच अमित कुमार कुर्रे के अनुसार, पंचायत में लंबे समय से ग्रामसभा की बैठक भी आयोजित नहीं की गई है। उनका आरोप है कि जब पंचायत की राशि और खर्च का हिसाब मांगा जाता है तो संतोषजनक जानकारी देने के बजाय टालमटोल किया जाता है। पंचों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं, जबकि विभिन्न मदों से राशि लगातार निकाले जाने की बात सामने आ रही है।
ग्रामसभा की बैठक को लेकर भी विवाद
पंचों के अनुसार, 4 अक्टुसूखाताल पंचायत में वित्तीय अनियमितता के आरोप, उप सरपंच-पंचों ने उठाए सवाल
बिना प्रस्ताव राशि आहरण और ग्रामसभा नहीं कराने का आरोप ।
सरपंच ने कहा—विकास कार्यों में खर्च हुई राशि
सूखाताल। ग्राम पंचायत सूखाताल में सरपंच के खिलाफ उप सरपंच एवं पंचों ने वित्तीय अनियमितता और पंचायत संचालन में मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उप सरपंच अमित कुमार कुर्रे सहित अन्य पंचों का आरोप है कि पंचायत की 15वें वित्त आयोग सहित अन्य मदों की राशि का आहरण बिना पंचों एवं उप सरपंच को विश्वास में लिए और बिना पंचायत प्रस्ताव के किया जा रहा है। पंचों का कहना है कि पंचायत में होने वाले आय-व्यय की जानकारी भी उन्हें नियमित रूप से नहीं दी जा रही है।
उप सरपंच अमित कुमार कुर्रे के अनुसार, पंचायत में लंबे समय से ग्रामसभा की बैठक भी आयोजित नहीं की गई है। उनका आरोप है कि जब पंचायत की राशि और खर्च का हिसाब मांगा जाता है तो संतोषजनक जानकारी देने के बजाय टालमटोल किया जाता है। पंचों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं, जबकि विभिन्न मदों से राशि लगातार निकाले जाने की बात सामने आ रही है।
ग्रामसभा की बैठक को लेकर भी विवाद
पंचों के अनुसार, 4 अक्टुबर को ग्रामसभा की बैठक आयोजित किए जाने की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में बैठक की तारीख बदलकर 6 अक्टूबर किए जाने की सूचना व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दी गई। ग्रामीणों को बैठक में शामिल होने की सूचना मिलने के बाद भी निर्धारित तिथि पर ग्रामसभा आयोजित नहीं हो सकी। पंचों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामसभा ग्रामीणों के सामने पंचायत के कामकाज और आय-व्यय की जानकारी रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है, ऐसे में बैठक लगातार टलना गंभीर विषय है।
आरटीआई का जवाब नहीं मिलने का आरोप
उप सरपंच अमित कुमार कुर्रे ने पंचायत के आय-व्यय, राशि आहरण तथा बिल-वाउचर से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। उनका आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद ग्राम पंचायत के जन सूचना अधिकारी द्वारा अब तक मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
पंचों का कहना है कि यदि पंचायत की राशि नियमानुसार और विकास कार्यों में खर्च हुई है तो बिल, वाउचर और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि अभिलेख सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सरपंच पति के हस्ताक्षर को लेकर भी सवाल
पंचों एवं ग्रामीणों ने सरपंच पति की पंचायत के कामकाज में कथित दखल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि महिला सरपंच होने के बावजूद पंचायत के कई कार्यों में उनके पति की भूमिका अधिक दिखाई देती है। यहां तक कि जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य दस्तावेजों में सरपंच की जगह उनके पति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में पंचों एवं उप सरपंच द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, उनका कहना है कि अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सचिव बोले—विवाद के कारण टली ग्रामसभा
ग्रामसभा की बैठक नहीं होने के संबंध में पंचायत सचिव से फोन पर जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि ग्राम पंचायत सूखा ताल में वर्तमान में विवाद की स्थिति बनी हुई है। ऐसी स्थिति में किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए बैठक को स्थगित किया गया है। उनका कहना था कि माहौल शांत होने के बाद ग्रामसभा की बैठक आयोजित की जाएगी।
सरपंच ने आरोपों को नकारा
वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर सरपंच ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पंचायत से निकाली गई राशि का उपयोग गांव के विकास कार्यों में ही किया गया है। उनके अनुसार नाली की साफ-सफाई, बजरी-गिट्टी, जेसीबी कार्य तथा पेयजल व्यवस्था सहित आवश्यक कार्यों में राशि खर्च की गई है।
हालांकि, पंचों का कहना है कि यदि राशि वास्तव में इन्हीं कार्यों में खर्च हुई है तो संबंधित बिल-वाउचर, प्रस्ताव और अन्य अभिलेख सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि ग्रामीणों के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
पंचों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पंचायत के वित्तीय लेन-देन, 15वें वित्त आयोग की राशि, बिल-वाउचर, पंचायत प्रस्ताव, ग्रामसभा की बैठकों तथा अन्य अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत में पारदर्शिता के साथ काम होना चाहिए और सभी पंचों को विश्वास में लेकर विकास कार्य किए जाने चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन सूखा ताल पंचायत में लगाए गए आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पंचायत के वित्तीय अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि विवाद का स्थायी समाधान कर पंचायत में नियमित ग्रामसभा आयोजित हो तथा विकास कार्य पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ें।बर को ग्रामसभा की बैठक आयोजित किए जाने की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में बैठक की तारीख बदलकर 6 अक्टूबर किए जाने की सूचना व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दी गई। ग्रामीणों को बैठक में शामिल होने की सूचना मिलने के बाद भी निर्धारित तिथि पर ग्रामसभा आयोजित नहीं हो सकी। पंचों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामसभा ग्रामीणों के सामने पंचायत के कामकाज और आय-व्यय की जानकारी रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है, ऐसे में बैठक लगातार टलना गंभीर विषय है।
आरटीआई का जवाब नहीं मिलने का आरोप
उप सरपंच अमित कुमार कुर्रे ने पंचायत के आय-व्यय, राशि आहरण तथा बिल-वाउचर से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। उनका आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद ग्राम पंचायत के जन सूचना अधिकारी द्वारा अब तक मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
पंचों का कहना है कि यदि पंचायत की राशि नियमानुसार और विकास कार्यों में खर्च हुई है तो बिल, वाउचर और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि अभिलेख सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सरपंच पति के हस्ताक्षर को लेकर भी सवाल
पंचों एवं ग्रामीणों ने सरपंच पति की पंचायत के कामकाज में कथित दखल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि महिला सरपंच होने के बावजूद पंचायत के कई कार्यों में उनके पति की भूमिका अधिक दिखाई देती है। यहां तक कि जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य दस्तावेजों में सरपंच की जगह उनके पति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में पंचों एवं उप सरपंच द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, उनका कहना है कि अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
*सचिव बोले—विवाद के कारण टली ग्रामसभा*
ग्रामसभा की बैठक नहीं होने के संबंध में पंचायत सचिव से फोन पर जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि ग्राम पंचायत सूखा ताल में वर्तमान में विवाद की स्थिति बनी हुई है। ऐसी स्थिति में किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए बैठक को स्थगित किया गया है। उनका कहना था कि माहौल शांत होने के बाद ग्रामसभा की बैठक आयोजित की जाएगी।
*सरपंच ने आरोपों को नकारा*
*वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर सरपंच ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पंचायत से निकाली गई राशि का उपयोग गांव के विकास कार्यों में ही किया गया है। उनके अनुसार नाली की साफ-सफाई, बजरी-गिट्टी, जेसीबी कार्य तथा पेयजल व्यवस्था सहित आवश्यक कार्यों में राशि खर्च की गई है।*
हालांकि, पंचों का कहना है कि यदि राशि वास्तव में इन्हीं कार्यों में खर्च हुई है तो संबंधित बिल-वाउचर, प्रस्ताव और अन्य अभिलेख सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि ग्रामीणों के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
पंचों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पंचायत के वित्तीय लेन-देन, 15वें वित्त आयोग की राशि, बिल-वाउचर, पंचायत प्रस्ताव, ग्रामसभा की बैठकों तथा अन्य अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत में पारदर्शिता के साथ काम होना चाहिए और सभी पंचों को विश्वास में लेकर विकास कार्य किए जाने चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन सूखा ताल पंचायत में लगाए गए आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पंचायत के वित्तीय अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि विवाद का स्थायी समाधान कर पंचायत में नियमित ग्रामसभा आयोजित हो तथा विकास कार्य पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ें।


