करोड़ों की जमीन के खेल,खेलने वाले सरकारी नुमाइंदे कौन?
*रिकॉर्ड की त्रुटि, सुधार का मामला और एसडीएम कोर्ट में लंबित प्रकरण… आखिर जमीन के इस पूरे खेल की असली कहानी क्या है?*
*राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल, जिला मुख्यालय से ब्लॉक मुख्यालय तक जमीनों के मामलों की निष्पक्ष जांच की उठी मांग*

बेमेतरा – जिले में निजी जमीनों से जुड़े राजस्व मामलों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिकॉर्ड में कथित त्रुटि, उसके सुधार के नाम पर चल रही प्रक्रिया और एसडीएम न्यायालय में लंबित प्रकरणों के बीच जमीनों की वास्तविक स्थिति क्या है—यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन का मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में लंबित है, तो उससे जुड़े दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई? रिकॉर्ड की त्रुटि आखिर हुई कैसे और उसे सुधारने की प्रक्रिया में किस-किस अधिकारी अथवा कर्मचारी की भूमिका रही? क्या पूरे मामले की फाइल और आदेशों की स्वतंत्र जांच हुई है?
*करोड़ों की जमीन, लेकिन जवाब देने से परहेज क्यों?*
मामले से जुड़े जिम्मेदार सरकारी नुमाइंदों से जब सवाल पूछे जाने की कोशिश होती है, तो संवाद से दूरी क्यों दिखाई देती है—यह भी अपने आप में एक सवाल है। आखिर मीडिया के सवालों का सामना करने में संकोच किस बात का है?
क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला है, या इसके पीछे जमीन से जुड़े हितों का कोई बड़ा विवाद है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं।
दलाल कौन और किसके संरक्षण में?
जमीन से जुड़े मामलों में कथित दलाली की चर्चा सामने आती है तो सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि दलाल कौन है, उसने किसके माध्यम से काम किया और राजस्व कार्यालय की प्रक्रिया तक उसकी पहुंच कैसे बनी?
यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध विभागीय जांच और दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित अधिकारी भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
*एसडीएम कोर्ट में मामला लंबित, फिर असली स्थिति क्या?*
रिकॉर्ड सुधार से जुड़ा मामला यदि एसडीएम न्यायालय में लंबित है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? अब तक कितनी सुनवाई हुई? किन दस्तावेजों के आधार पर पक्षकारों ने अपना दावा प्रस्तुत किया? और राजस्व रिकॉर्ड में किस स्तर पर क्या प्रविष्टियां की गईं?
इन सवालों के जवाब फाइल, आदेश-पत्र और प्रमाणित राजस्व अभिलेख ही दे सकते हैं।सरकारी तंत्र पर सवाल तो जांच भी पारदर्शी हो जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक मुख्यालयों तक जमीन संबंधी मामलों को लेकर यदि लगातार शिकायतें और विवाद सामने आ रहे हैं, तो प्रशासन को केवल मौखिक स्पष्टीकरण तक सीमित रहने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
खासकर उन मामलों में जहां जमीन की कीमत करोड़ों में होने का दावा किया जा रहा है, वहां राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन, खसरा-पंचशाला, बी-1, नक्शा, आदेश-पत्र और न्यायालयीन प्रकरण की जांच जरूरी है।
*अब सवाल सीधे प्रशासन से*
क्या जिले में जमीन संबंधी विवादों की स्वतंत्र जांच होगी?
क्या कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच होगी?
क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका दस्तावेजों के आधार पर तय होगी?
क्या लंबित एसडीएम प्रकरणों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?और सबसे बड़ा सवाल—यदि किसी सरकारी नुमाइंदे की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई कब होगी?
न्यूज़ स्टोरी दृष्टि इन सवालों को किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि दस्तावेजों और प्रशासनिक जवाबदेही के आधार पर सामने लाने का प्रयास कर रहा है। संबंधित अधिकारी, कर्मचारी या जमीन से जुड़े पक्ष यदि अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
खबर वही, जो सवाल खड़े करे।
न्यूज़ स्टोरी दृष्टि—सवाल जारी रहेगा, जवाब आने तक।


