सीएचएमओ बदलते ही बेमेतरा स्वास्थ्य विभाग में बड़े खुलासे की आहट!
*खरीदी की सामग्री पहुंची ही नहीं तो कैसे हुआ मिलान? शिकायत के बाद जांच किसने की, स्टोर प्रभारी कौन था? सबसे बड़ा सवाल—यदि स्टोर प्रभारी और जांच अधिकारी एक ही व्यक्ति था, तो अपने ही कार्य की निष्पक्ष जांच कैसे हुई?*

बेमेतरा – स्वास्थ्य विभाग में शासकीय सामग्री की खरीदी, आपूर्ति, भौतिक सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामला सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि खरीदी गई सामग्री वास्तव में संबंधित स्वास्थ्य संस्था या स्टोर तक पहुंची थी या नहीं, बल्कि शिकायत के बाद हुई जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जिस सामग्री की खरीदी का दावा किया गया, यदि वह मौके पर पहुंची ही नहीं थी, तो उसका मिलान और भौतिक सत्यापन आखिर किस आधार पर किया गया? क्या संबंधित स्टोर का वास्तविक निरीक्षण किया गया था? क्या सामग्री की उपलब्धता का मौके पर पंचनामा बनाया गया? क्या स्टॉक रजिस्टर, बिल, सप्लाई चालान और भुगतान अभिलेखों का आपस में मिलान किया गया?
शिकायत के बाद जांच किसने की?
शिकायत सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच कराए जाने की बात सामने आती है। लेकिन अब असली सवाल जांच की निष्पक्षता और जिम्मेदारी को लेकर है।
जांच अधिकारी कौन था?
स्टोर प्रभारी कौन था?
क्या दोनों की भूमिका एक ही व्यक्ति के पास थी?
यदि ऐसा था, तो अपने ही कार्य और अपने ही अभिलेखों से संबंधित शिकायत की जांच उसी व्यक्ति ने किस आधार पर की?
यदि स्टोर प्रभारी ही जांच प्रक्रिया में अधिकारी की भूमिका में था, तो क्या यह जांच वास्तव में स्वतंत्र मानी जा सकती है? क्या ऐसी स्थिति में किसी अन्य स्वतंत्र अधिकारी या अलग जांच दल से भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए था? ये सवाल अब विभागीय दस्तावेज सामने आने के साथ और महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
बिना सामग्री के भौतिक सत्यापन कैसे?
मामले का सबसे बड़ा प्रश्न कथित तौर पर भौतिक सत्यापन को लेकर है।
यदि जांच रिपोर्ट में सामग्री को उपलब्ध अथवा सही पाया गया, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि जांच टीम ने सामग्री को कहां, कब और किसके सामने देखा?
क्या मौके पर जाकर सामग्री की गिनती की गई?
क्या प्रत्येक सामग्री का स्टॉक रजिस्टर से मिलान हुआ?
क्या सप्लायर के चालान से मात्रा और तारीख का मिलान किया गया?
क्या सामग्री की फोटो अथवा अन्य सत्यापन रिकॉर्ड तैयार किया गया?
और यदि सामग्री मौके पर मौजूद नहीं थी, तो रिपोर्ट में उसे सही कैसे माना गया?
खरीदी से भुगतान तक कौन-कौन जिम्मेदार?
पूरे मामले में केवल स्टोर प्रभारी की भूमिका ही नहीं, बल्कि खरीदी से लेकर भुगतान तक प्रत्येक स्तर की जिम्मेदारी की जांच जरूरी दिखाई देती है।
मांग किसने भेजी?
खरीदी की स्वीकृति किसने दी?
सप्लायर का चयन किस प्रक्रिया से हुआ?
सामग्री की आपूर्ति किस तारीख को दिखाई गई?
सामग्री प्राप्त करने वाला अधिकारी कौन था?
स्टॉक में किसने दर्ज किया?
भौतिक सत्यापन किसने किया?
बिल का सत्यापन किसने किया?
और अंततः भुगतान किस अधिकारी की स्वीकृति से हुआ?
यदि इन सभी दस्तावेजों का क्रमवार मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
*अब दस्तावेजों पर टिकी निगाहें*
मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अब विभागीय दस्तावेज बताए जा रहे हैं। खरीदी आदेश, सप्लाई चालान, स्टॉक रजिस्टर, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट, बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेख—इन सभी को एक साथ देखने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कागजों में दर्ज सामग्री और वास्तविक स्टॉक में कितना अंतर था।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि शिकायत के बाद जांच करने वाले अधिकारी और संबंधित स्टोर प्रभारी की भूमिका क्या थी और क्या दोनों भूमिकाएं किसी स्तर पर एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं।
*बड़ा सवाल—जांच हुई या सिर्फ कागजों का मिलान?*
अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायत की जांच वास्तविक भौतिक सत्यापन के आधार पर हुई थी या केवल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर?
अगर सामग्री वास्तव में मौके पर मौजूद थी, तो उसके भौतिक सत्यापन का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।
अगर सामग्री मौजूद नहीं थी, तो उसे सही बताए जाने का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
और यदि स्टोर प्रभारी ही जांच अधिकारी की भूमिका में रहा, तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि अपने ही कार्य से जुड़े मामले में निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की गई?
सीएचएमओ बदलने के बाद खुलेंगे पुराने फाइलों के पन्ने?
सीएचएमओ के बदलने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की पुरानी खरीदी और जांच प्रक्रियाओं पर भी निगाहें टिक गई हैं। हालांकि किसी अधिकारी या कर्मचारी पर निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
*लेकिन सवाल उठना स्वाभाविक है*
सामग्री नहीं पहुंची तो स्टॉक में कैसे आई?
स्टॉक में आई तो भौतिक सत्यापन किसने किया?
जांच हुई तो जांच अधिकारी कौन था?
और यदि जांच अधिकारी तथा स्टोर प्रभारी एक ही व्यक्ति था, तो अपने ही कार्य की जांच निष्पक्ष कैसे हुई?
इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकते हैं।न्यूज़ स्टोरी दृष्टि की पड़ताल जारी है।खबर वही… जो सवाल खड़े करे।


