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बेमेतरा मं सजे छत्तीसगढ़ी के महापर्व, राजभाषा सम्मेलन मं गूंजिस माटी के बोली के सुर

बेमेतरा मं सजे छत्तीसगढ़ी के महापर्व, राजभाषा सम्मेलन मं गूंजिस माटी के बोली के सुर

 

दसवां प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन मं जुटिन साहित्यकार, कवि अउ भाषा प्रेमी; व्याकरण, शब्दकोश, साहित्य ले लेके सोशल मीडिया अउ एआई तक छत्तीसगढ़ी के भविष्य ऊपर होइस मंथन

 

बेमेतरा :- छत्तीसगढ़ के माटी, महतारी बोली अउ अपन संस्कृति के सुगंध ले भरपूर बेमेतरा मं 26 अउ 27 सितंबर ला छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के दसवां प्रांतीय सम्मेलन के आयोजन होइस। दू दिन तक चले ये सम्मेलन मं प्रदेश के अलग-अलग अंचल ले साहित्यकार, कवि, लेखक, भाषा प्रेमी अउ विद्वान मन एके मंच मं जुटिन। चारों मुड़ा छत्तीसगढ़ी के बात, छत्तीसगढ़ी के साहित्य अउ छत्तीसगढ़ी के भविष्य के चर्चा सुनई दिस।

 

द किंग्स महल, बेमेतरा मं आयोजित ये सम्मेलन सिरिफ कार्यक्रम नइ रहिस, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन अउ आने वाला पीढ़ी तक ओकर मिठास पहुंचाय के दिशा मं एक ठन महत्वपूर्ण साहित्यिक मिलन बनके उभरिस। आयोजन के रूपरेखा मं भाषा, साहित्य, संस्कृति अउ आधुनिक तकनीक संग छत्तीसगढ़ी के जुड़ाव ऊपर अलग-अलग सत्र रखे गे रहिस।

 

*‘पुरखा के सुरता’ मं जागिस साहित्यिक विरासत*

 

सम्मेलन के एक खास सत्र ‘पुरखा के सुरता’ रहिस, जिहां छत्तीसगढ़ी साहित्य के पुरखा रचनाकार मन के योगदान ला सुरता करत साहित्य के परंपरा ऊपर बात रखे गे। अपन पुरखा मन के लिखे-बोले बात ला आज के पीढ़ी तक पहुंचाय के जरूरत ऊपर घलो जोर रहिस।

 

ए सत्र के संग छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य अउ अनुवाद परंपरा, बाल साहित्य जइसन विषय ऊपर घलो सार्थक चर्चा होइस। यानी छत्तीसगढ़ी के बात सिरिफ कविता तक सीमित नइ, बल्कि कहानी, गद्य, बाल साहित्य अउ अनुवाद के दुनिया मं घलो ओकर डहर बढ़ाय के मंथन होइस।

 

*व्याकरण अउ शब्दकोश ऊपर गहन मंथन*

 

दूसर दिन के कार्यक्रम मं छत्तीसगढ़ी व्याकरण, मानकीकरण अउ वृहद शब्दकोश निर्माण जइसन महत्वपूर्ण विषय ला जगह मिलिस। भाषा के लिखे-पढ़े के एकरूपता, शब्द मन के संकलन अउ छत्तीसगढ़ी ला व्यवस्थित रूप देय के दिशा मं विद्वान मन अपन विचार रखिन।

 

*सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया अउ एआई मं छत्तीसगढ़ी के नई उड़ान*

 

आज के डिजिटल जमाना ला देखत सम्मेलन मं ‘सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया अउ ए.आई. मं छत्तीसगढ़ी’ ऊपर घलो विशेष सत्र रखे गे। ये चर्चा खास रहिस, काबर आज छत्तीसगढ़ी बोली गांव के चौपाल ले निकलके मोबाइल, फेसबुक, यूट्यूब, डिजिटल मीडिया अउ एआई तक पहुंचत हे।

 

भाषा प्रेमी मन के बीच ये सवाल घलो सामने आइस कि जेन बोली ला हमर दाई-ददा मन घर-आंगन मं जियत रखिन, वोला नवा तकनीक के जमाना मं कतका मजबूत ढंग ले आगू बढ़ाय जा सकथे।

 

*कवि सम्मेलन मं गूंजिस छत्तीसगढ़ी के मिठास*

 

पहिली दिन के संझा छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन मं कविता अउ हास्य-व्यंग्य के रंग जमिस। अलग-अलग अंचल ले पहुंचे कवि मन अपन रचना ले श्रोता मन ला बांधे रखिन। बेमेतरा के धरती मं जब छत्तीसगढ़ी कविता के सुर गूंजिस, त पूरा माहौल मं माटी के अपनापन महसूस होइस।

 

*11 वरिष्ठ साहित्यकार मन के सम्मान*

 

सम्मेलन के अवसर मं छत्तीसगढ़ी भाषा अउ साहित्य के क्षेत्र मं उल्लेखनीय योगदान देय वाले 11 वरिष्ठ साहित्यकार मन के सम्मान घलो करे गे। प्रदेश के अलग-अलग अंचल के साहित्य साधक मन के सम्मान ला भाषा अउ साहित्य के सेवा के प्रति सम्मान के रूप मं देखे गे।

 

*बेमेतरा बनिस छत्तीसगढ़ी के साहित्यिक संगम*

 

दू दिन के ये आयोजन ये संदेश देके गे कि छत्तीसगढ़ी सिरिफ घर मं बोले जाथे वो भाषा नइ, बल्कि ये साहित्य, संस्कृति, इतिहास अउ हमर पहचान के मजबूत आधार आय।

 

बेमेतरा मं सजे ये राजभाषा सम्मेलन मं एके गो बात बार-बार उभरके सामने आइस—

“माटी बदल सकथे, बेरा बदल सकथे, तकनीक बदल सकथे, फेर अपन बोली के मिठास ला बचाय रखना हमर जिम्मेदारी आय।”

 

छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचाय के संकल्प संग दसवां प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन के समापन होइस। आयोजन के माध्यम ले बेमेतरा एक बेर फेर साहित्य अउ संस्कृति के नक्शा मं अपन अलग पहचान बनाइये।

Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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