अधिकारी के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई नहीं, तो कर्मचारी स्तर पर क्या हाल होगा?
एक दिन में काम पूरा कराने का आश्वासन, चार दिन बाद भी समस्या जस की तस — AE नवीन वर्मा की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

नवागढ़। ग्राम तारेगांव में लंबे समय से क्षतिग्रस्त विद्युत पोल को बदलने की मांग को लेकर शिकायतकर्ता लगातार विभागीय अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। वर्षों से लंबित इस समस्या के निराकरण के लिए सीएम हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद नवागढ़ विद्युत विभाग के AE नवीन वर्मा द्वारा फोन पर एक दिन के भीतर कार्य पूर्ण कराने का आश्वासन दिया गया था।
लेकिन आश्वासन के बाद भी चार दिन बीत जाने के बावजूद मौके पर काम नहीं होने की बात सामने आ रही है। इतना ही नहीं, शिकायत की स्थिति जानने के लिए जब संबंधित अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो फोन रिसीव नहीं होने की शिकायत सामने आई है।
जब जिम्मेदार अधिकारी के आश्वासन पर ही अमल नहीं, तो नीचे क्या स्थिति होगी?
मामला केवल एक विद्युत पोल का नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही और शिकायत निवारण व्यवस्था की कार्यप्रणाली का है। जब एक जिम्मेदार अधिकारी स्वयं समय-सीमा बताकर कार्य पूरा कराने का आश्वासन देता है और निर्धारित समय बीतने के बाद भी कार्य धरातल पर नजर नहीं आता, तो सवाल उठना लाजिमी है कि विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?
क्या अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन की कोई विभागीय मॉनिटरिंग होती है?
क्या शिकायतों के निराकरण की समय-सीमा तय होने के बाद उसकी समीक्षा की जाती है?
क्या अधिकारी के आश्वासन के बाद भी काम लंबित रहने पर किसी की जवाबदेही तय होती है?
सीएम हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत, फिर भी समाधान का इंतजार
जब सामान्य स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं हुआ, तब मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा। इसके बाद अधिकारी द्वारा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि सीएम हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायत में भी समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो आम उपभोक्ता अपनी समस्या के समाधान के लिए आखिर किस स्तर तक जाए?
जिम्मेदार अधिकारी यदि शिकायत के बाद दिए गए आश्वासन की समय-सीमा का पालन सुनिश्चित नहीं करा पा रहे हैं, तो क्या विभागीय व्यवस्था में जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित रह गई है?
अब देखना होगा कि विद्युत विभाग इस मामले में क्षतिग्रस्त पोल को कब बदलेगा और अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन पर अमल क्यों नहीं हुआ, इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी।


