सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला, फिर भी 45 साल के संघर्ष के बाद दर-दर भटकने को मजबूर ननाबाई!

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी तहसील कार्यालय के चक्कर काट रही फरियादी, आखिर कब मिलेगा न्याय? कलेक्टर और एसपी से लगाई गुहार।
बेमेतरा/बेरला। कहते हैं कि आसमान से गिरे तो खजूर में अटके! यह कहावत बेरला तहसील क्षेत्र के जमीन विवाद से जुड़े मामले में पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आ रही है। अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए करीब 45 वर्षों तक संघर्ष करने वाली ननाबाई पति लक्ष्मण को आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय से न्याय तो मिला, लेकिन विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी उनकी परेशानी खत्म होती नजर नहीं आ रही है।
ननाबाई और भगवती बंजारे के बीच लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अब भी तहसील कार्यालय में पेशियों के चक्कर लगाए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत से आदेश मिल चुका है, तो फिर उसके पालन और न्याय दिलाने में देरी क्यों हो रही है?
न्याय की आस में वर्षों से संघर्ष कर रही ननाबाई अब अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के दरबार पहुंची हैं। उनकी मांग है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए और उन्हें उनकी पुश्तैनी संपत्ति का फसल को विपक्ष के लोगों के द्वारा बलपूर्वक काटकर ले जाने वाले पर कार्यवाही आखिर क्यो नही कर रही है..? क्या है भगवती के पास जो बुजुर्गो के साथ मारपीट और खडी फसल को लाठी के दम पर काटकर ले जा रहे है और जमीन क मालिक ताक देखते रह गया थाना बेरला से न्याय की गुहार भी अनसुनी क्यों..? क्या कानून अप्रिय घटना को अंजाम दिलाना चाह रहे है..?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन ननाबाई को न्याय दिला पाएगा? या फिर 45 वर्षों का संघर्ष करने के बाद भी उन्हें अपनी ही जमीन के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर भटकना पड़ेगा?
न्यायालय का आदेश यदि जमीन पर लागू ही नहीं हो पा रहा, तो आम आदमी आखिर न्याय की उम्मीद किससे करे?


