बेमेतरा में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक या सिर्फ कागजी उपलब्धियों की वाहवाही?

*गांव-गांव में नल तो लग गए, लेकिन जल का आज भी इंतजार! ठेकेदारों की मनमर्जी और विभागीय निगरानी पर उठे सवाल, आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी?*
बेमेतरा – सरकार का दावा है कि हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना प्राथमिकता है, लेकिन बेमेतरा जिले के कई गांवों में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग तस्वीर पेश करती नजर आ रही है। कहीं नल लगे हैं तो पानी नहीं, कहीं पाइपलाइन बिछी है तो नियमित आपूर्ति नहीं और कहीं योजनाओं का संचालन ही सवालों के घेरे में है। ऐसे में सवाल है कि आखिर हर घर नल-जल का सपना धरातल पर पूरा हो रहा है या फिर योजनाएं केवल फाइलों और समीक्षा बैठकों तक सीमित हैं?
5 नवंबर 2026 को कलेक्ट्रेट में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इसमें समूह जलप्रदाय योजनाओं, TPI देयकों के भुगतान, 8 सितंबर के बाद प्राप्त बजट आवंटन, एकल ग्राम नलजल योजनाओं के रखरखाव और नियमित संचालन पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी गांव में पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए और हर घर तक शुद्ध एवं नियमित पानी पहुंचना चाहिए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों का वास्तविक पालन गांवों में कौन सुनिश्चित करेगा? जब योजनाओं की जमीनी स्थिति पर ही सवाल उठ रहे हैं, तो केवल भुगतान, बजट और प्रगति की समीक्षा से आम जनता की प्यास कैसे बुझेगी?
*योजना वार जवाबदेही आखिर कब तय होगी?*
– समूह जलप्रदाय योजना: जिन गांवों को समूह जलप्रदाय योजना से जोड़ने का दावा किया जा रहा है, वहां वास्तविक जलापूर्ति कितने घरों तक हो रही है? क्या नियमित सप्लाई की निगरानी हो रही है?
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– एकल ग्राम नलजल योजना: जिन गांवों में नल कनेक्शन दिए गए हैं, वहां पानी कितने दिनों से नियमित पहुंच रहा है? बंद पड़ी योजनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
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– ठेकेदारों की जवाबदेही: निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण काम नहीं करने और योजना चालू नहीं कर पाने वाले ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई हुई? क्या दोषी ठेकेदारों को नोटिस, जुर्माना या ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया अपनाई गई?
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– TPI और भुगतान: तकनीकी निरीक्षण एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर भुगतान हो रहा है या केवल कागजी प्रगति के आधार पर देयकों का अनुमोदन किया जा रहा है? अधूरे कार्यों की जवाबदेही कौन लेगा?
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– रखरखाव और संचालन: नलजल मित्रों को जागरूकता की जिम्मेदारी देने के साथ क्या उन्हें आवश्यक संसाधन और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है?
*अधिकारियों की समीक्षा बनाम गांवों की वास्तविकता!*
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता जे.पी. गोंड सहित विभागीय टीम की मौजूदगी में समीक्षा तो हो रही है, लेकिन ग्रामीणों को नियमित पानी मिल रहा है या नहीं, इसकी वास्तविक रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं होती? क्या विभाग के जिला स्तरीय जिम्मेदार अधिकारी गांवों में पहुंचकर योजनाओं का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं, या फिर कार्यालय में बैठकर प्रगति की समीक्षा और उपलब्धियों की वाहवाही ही कर्तव्य की इतिश्री बन गई है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नल में जल ही नहीं, तो हर घर नल-जल योजना की सफलता का दावा आखिर किस आधार पर?
बेमेतरा जिले की जनता को बजट आवंटन, भुगतान और समीक्षा बैठकों की जानकारी से ज्यादा जरूरत नियमित पेयजल की है। अब समय आ गया है कि विभाग गांववार योजनाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे, बंद पड़ी योजनाओं को चालू कराए और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे।
क्योंकि जनता को कागजों में चलती योजना नहीं, घर के नल में बहता पानी चाहिए।
फोन नही उठाने से पक्ष स्पष्ट नही हो पाया। विभागीय अधिकारी की निष्कृयता और मनमानी ऐसे ही झलकने लगते है। ना फोन उठाते है ना ही बात करने की फूर्सत नही जिम्मेदार अधिकारी को।
*जे.पी.गोंड*
*लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता बेमेतरा*


